चंडीगढ़ के दर्जे पर केंद्र का यू-टर्न: शीतकालीन सत्र में बिल लाने की योजना नहीं, CM मान ने जताई खुशी

चंडीगढ़: चंडीगढ़ के प्रशासनिक दर्जे (स्टेटस) को बदलने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और न ही शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर) में इससे संबंधित कोई बिल लाने की योजना है। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उचित परामर्श के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा, इसलिए किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
CM मान ने किया केंद्र के फैसले का स्वागत
केंद्र सरकार के इस बयान के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर खु.शी जाहिर की है। उन्होंने लिखा, “मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ वाले बिलL

को वापस लेने और पार्लियामेंट में न लाने का फैसला किया है। उम्मीद है कि भविष्य में भी पंजाब से संबंधित कोई भी फैसला पंजाब के लोगों से पूछे बिना नहीं होगा।”
CM मान ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा, “ऐसे फैसले लेते ही क्यों हैं जो वापस लेने पड़ें? देश ऐसे नोटिफिकेशनों से नहीं चलता।” उन्होंने केंद्र को आगाह किया कि पंजाब गुरुओं, पीरों और शहीदों की धरती है, पंजाब के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश न की जाए।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, पहले यह ख़बर सामने आई थी कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 239 से हटाकर अनुच्छेद 240 में शामिल करने के लिए शीतकालीन सत्र में एक बिल ला सकती है। इस बदलाव से चंडीगढ़ पूरी तरह से केंद्र शासित प्रदेश (UT) बन जाता, जिससे प्रशासनिक अधिकार राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के पास चले जाते।

पंजाब के राजनीतिक दलों, जिनमें पंजाब सरकार, कांग्रेस और अकाली दल शामिल थे, ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था। उन्हें आशंका थी कि इससे चंडीगढ़ पर पंजाब का नियंत्रण पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। केंद्र सरकार के नवीनतम बयान ने फिलहाल इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक खींचतान को शांत कर दिया है।








