अवैध खनन पर कार्रवाई, अधिकारियों का दावा- रोकना मुश्किल

पठानकोट में माइनिंग का काला कारोबार
यह अवैध कारोबार विशेष रूप से जिला पठानकोट के भोआ हल्का के सहारनपुर क्षेत्र में खुलेआम चल रहा है
आज की सबसे बड़ी खबर, जिसका संबंध आपके और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा से है। पंजाब में जिस का खेत उस की रेत (जिसका खेत उसकी रेत) योजना का लगातार गलत फायदा उठाया जा रहा है।

तस्वीरें साफ गवाही दे रही हैं कि किस तरह अवैध खनन का खेल चल रहा है। कुछ लोगों द्वारा खुलेआम दरिया के किनारे अवैध माइनिंग की जा रही है।

कानून की आड़ में गैरकानूनी
- बाढ़ के बाद योजना: पिछले दिनों पंजाब में भारी बारिश से आई बाढ़ के बाद सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए एक नीति तैयार की थी, जिसे नाम दिया गया था ‘जिस का खेत उस की रेत’।
- योजना का दुरुपयोग: इस योजना की आड़ में कुछ क्रशर मालिकों द्वारा लगातार इसका गैरकानूनी फायदा उठाया जा रहा है।
- दिन-रात खनन: खनन करने वाले बेखौफ होकर, दिन-रात माइनिंग को अंजाम दे रहे हैं।
- क्षेत्रीय प्रभाव: यहां तक कि यह खनन इस हद तक हावी हो चुका है कि जिधर भी देखें, मशीनें ही मशीनें नज़र आती हैं।

पठानकोट में माइनिंग का काला कारोबार
यह अवैध कारोबार विशेष रूप से जिला पठानकोट के भोआ हल्का के सहारनपुर क्षेत्र में खुलेआम चल रहा है।
ट्रकों में रेत भरकर लगातार बाहर भेजी जा रही है। स्थानीय लोगों ने कई बार माइनिंग विभाग को इसकी शिकायत की है।

अधिकारियों की मजबूरी और कार्रवाई
एफआईआर दर्ज: शिकायतों के बाद, माइनिंग विभाग ने कार्रवाई करते हुए कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
- SDO का बयान: जब हमने माइनिंग विभाग के SDO गुरमुख सिंह से बात की, तो उन्होंने अपनी परेशानी व्यक्त की।
- पकड़ना मुश्किल: SDO का कहना था कि उनका दफ्तर माधोपुर में है, और जब तक वे माधोपुर से सहारनपुर पहुंचते हैं, तब तक खनन करने वाले माइनिंग बंद कर फरार हो जाते हैं।
- संसाधनों की कमी: उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास कोई सोर्स नहीं है, जिसकी वजह से वे मौके पर उन्हें काबू नहीं कर पाते।

निष्कर्ष
अवैध खनन का यह सिलसिला, नदियों और पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है। यह बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक अधिकारी संसाधनों की कमी का हवाला देकर इस खुलेआम चल रहे गैरकानूनी काम से पल्ला झाड़ते रहेंगे? और कब तक ‘जिस का खेत उस की रेत’ योजना का दुरुपयोग होता रहेगा?








