पंजाब में पहली बार शुरू हुई पैरासेलिंग: पठानकोट का ‘मिनी गोवा’ बना अंतरराष्ट्रीय एडवेंचर हब
पठानकोट: पंजाब के निवासियों और पर्यटकों को अब पैरासेलिंग और वाटर स्पोर्ट्स के रोमांच का आनंद लेने के लिए गोवा या विदेश जाने की आवश्यकता नहीं होगी। पठानकोट स्थित रंजीत सागर बांध झील (आरएसडी झील) और शाहपुरकंडी बैराज झील के ‘मिनी गोवा’ (चमरोड़ पतन) में इन रोमांचक गतिविधियों की शुरुआत हो चुकी है।
सफल ट्रायल और सुरक्षा मानक
शाहपुरकंडी बैराज झील में 10 दिन पहले भारत सरकार के सर्टीफाइड इंस्ट्रक्टर की देखरेख में पैरासेलिंग का सफल ट्रायल किया गया। कंपनी के मालिक पुनीत सैनी (पिंटा) के अनुसार, सभी वाटर स्पोर्ट्स और पैरासेलिंग गतिविधियां भारत सरकार के सुरक्षा मानकों के तहत करवाई जा रही हैं। पर्यटकों के लिए मजबूत रोप, लाइफ सेविंग जैकेट और इंश्योरेंस की पूरी व्यवस्था की गई है।
अगस्त अंत तक शुरू होंगी अन्य गतिविधियां
पैरासेलिंग के अलावा, स्पीड बोट, क्रूज और जेट स्की गतिविधियों की शुरुआत इस महीने के अंत तक पूर्ण रूप से कर दी जाएगी। क्रूज राइड के दौरान पर्यटकों को लंच, फूड किट्स और टॉयलेट की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रमुख गतिविधियां एवं सुविधाएं
- एडवेंचर & थ्रिल: जिप लाइन (Zipline), ATV राइड्स (Off-Road), गन टारगेट शूटिंग, हॉट एयर बैलून, ऊंट व घोड़े की सवारी, और बंजी ट्रैम्पोलिन।
- नाइट स्टे & कैंपिंग: वन विभाग द्वारा 8 लग्जरी ईको-हट्स व टेंट (ऑनलाइन/ऑफलाइन बुकिंग), इन-हाउस किचन (लंच/डिनर), और स्टारगाजिंग कैंपिंग।
- पिकनिक & रिलैक्सिंग: शेडेड गजीबो, बेंच, प्री-वेडिंग फोटोशूट व रील्स स्पॉट्स, और स्थानीय फूड स्टॉल्स।
- प्रमुख दर्शनीय स्थल: पवित्र मुक्तेश्वर धाम गुफा, 592 मीटर लंबा अटल सेतु (Cable-stayed Bridge), और धार नेचर रिट्रीट।
श्रद्धालुओं के लिए मुक्तेश्वर धाम तक सीधी बोटिंग
शाहपुरकंडी बैराज झील में बोटिंग का ठेका ₹50 लाख में 3 साल के लिए अलॉट किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही शाहपुरकंडी बैराज से पवित्र मुक्तेश्वर धाम गुफा तक बोटिंग सेवा शुरू की जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को 350 कठिन सीढ़ियां उतरने-चढ़ने से मुक्ति मिलेगी और वे सीधे मुख्य स्थल तक पहुँच सकेंगे।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चमरोड़ पतन की मुख्य सड़क की मरम्मत कर उसे नया बनाया जा रहा है। साथ ही, झील किनारे हरे घास के मैदानों में पर्यटकों के बैठने के लिए नए गजीबो और बेंच लगाए जा रहे हैं।











