पठानकोट: बिजली कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल जारी, मान सरकार के खिलाफ नारेबाजी
विभागीय अनदेखी, बकाया डीए और कर्मचारियों को पक्का न करने से रोष; 26 जुलाई तक खिंच सकती है स्ट्राइक
पठानकोट: पठानकोट में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बाद अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) यानी बिजली विभाग के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पंजाब सरकार के खिलाफ जारी इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने राज्य सरकार और PSPCL प्रबंधन के विरुद्ध उग्र नारेबाजी की।
21 जुलाई से जारी है हड़ताल
21 जुलाई से शुरू हुई कर्मचारियों की यह हड़ताल आज (24 जुलाई) भी बदस्तूर जारी रही। धरना दे रहे यूनियन नेताओं का कहना है कि यह हड़ताल 25 और 26 जुलाई तक खिंच सकती है और यदि सरकार ने उनकी मांगें जल्द नहीं मानी, तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
- बकाया 18% डीए (DA): कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनका 18% महंगाई भत्ता लंबे समय से रोक रखा है, जो उनका अधिकार है।
- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: विभाग में वर्षों से काम कर रहे अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों को बेहद कम वेतन में काम करना पड़ रहा है, जिन्हें तुरंत नियमित (पक्का) किया जाए।
- पे-स्केल में संशोधन: पुराने वेतनमान और पे-स्केल की विसंगतियों को दूर कर संशोधन लागू किया जाए।
- कर्मचारियों की भारी कमी: विभाग में स्टाफ की भारी किल्लत है। एक-एक कर्मचारी चार-चार लोगों का काम कर रहा है, जिससे अत्यधिक तनाव और आए दिन गंभीर हादसे हो रहे हैं।
“बैठकों के छलावे से काम नहीं चलेगा, अब चाहिए लिखित सर्कुलर”
“हम पिछले चार-पांच सालों से लगातार अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। प्रबंधन केवल बैठकों में बुलाकर समय और पैसे की बर्बादी करता है, लेकिन फैसले लागू नहीं करता। हमें अब सिर्फ बैठकों का आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों की मंजूरी का आधिकारिक सर्कुलर चाहिए।” > — बलविंदर भगत, लीगल एडवाइजर (ग्रिड सब-स्टेशन एम्प्लॉइज यूनियन)
निजीकरण और मुफ्त बिजली नीति पर उठाए सवाल
यूनियन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार की मुफ्त बिजली नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि बैंक कर्ज लेकर पंजाब को डुबोया जा रहा है। मुफ्त बिजली देने के बजाय सरकार को बिजली की दरें जायज और कम करनी चाहिए ताकि विभाग मजबूत हो सके।
इसके साथ ही नेताओं ने आशंका जताई कि सरकार भारी कर्ज दिखाकर बिजली विभाग को निजी हाथों (Privatization) में बेचने की तैयारी कर रही है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को बेरोजगारी के रूप में भुगतना पड़ेगा।
भीषण गर्मी और मॉनसून में जनता परेशान
भीषण गर्मी, उमस और मॉनसून के मौसम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह बिजली कट और फॉल्ट सुधरने में देरी हो रही है।
इस पर यूनियन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि बिजली सप्लाई ठप होने पर अचानक लोड न बढ़ाएं और लाइन चालू होने के 10-15 मिनट बाद ही भारी उपकरण (जैसे एसी) चलाएं ताकि ओवरलोडिंग से ट्रांसफॉर्मर और तारों में आग लगने जैसी घटनाएं न हों।











