लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 मौतों का सच राख में दफन, अगले हादसे के इंतजार में सो रहा सिस्टम
लखनऊ: अलीगंज के पुरनिया चौराहे के पास उस अवैध कॉम्प्लेक्स में लगी आग की आंच भले ही अब ठंडी हो चुकी हो, लेकिन व्यवस्था पर उठे सुलगते सवाल आज भी जस के तस हैं। 15 मासूम और होनहार छात्रों की मौत का खौफनाक सच बिना किसी ठोस नतीजे के उसी राख में दफन हो चुका है। हादसे के बाद दिखा प्रशासनिक अमले का गुस्सा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश, सब फाइलों के अंबार में खो गए हैं। ऐसा लगता है कि अफसरों के काले कारनामे भी इस ठंडी हो चुकी राख के साथ मिलकर हवा में उड़ चुके हैं।
अब अगर कुछ बाकी बचा है, तो वह सिर्फ उस खंडहर हो चुके कॉम्प्लेक्स का ढांचा। इमारत इस स्थिति में नहीं है कि उसे दोबारा ठीक किया जा सके, लेकिन शायद इस पर भी बुलडोजर चलाने के लिए प्रशासन को किसी विशेष ‘मुहूर्त’ का इंतजार है।
18 अफसरों की सूची भेजकर प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
हादसे के वक्त जब 15 युवा छात्रों की चीखें गूंजीं, तो लगा कि सिस्टम जागेगा। लेकिन हुआ वही ढाक के तीन पात। ले-देकर 18 दोषी अधिकारियों की एक सूची तैयार की गई और कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी गई। बस, इतने पर ही प्रशासन ने अपना काम खत्म मान लिया। मुख्यमंत्री के फायर सेफ्टी जांच के कड़े आदेशों के बाद दो-चार दिन तो अफसर सड़कों पर हलकान दिखते रहे, लेकिन आज तक यह आंकड़ा सामने नहीं आया कि शहर के कितने अवैध कॉम्प्लेक्सों को नोटिस थमाया गया। अग्निशमन विभाग (Fire Department) को कितने होटल, स्कूल और नर्सिंग होम बिना फायर सेफ्टी के चलते मिले और उन पर क्या एक्शन हुआ, इस पर पूरी तरह से रहस्य का पर्दा पड़ा हुआ है। साफ़ है कि जांच दब चुकी है और सबकी ‘दुकानें’ फिर से धड़ल्ले से सजने लगी हैं। बिजली विभाग हो या फायर विभाग, ऐसा लगता है कि सबको अब अगले किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
“15 छात्रों की चीखें भी सिस्टम के बहरे कानों तक नहीं पहुंच सकीं। अफसरों की लापरवाही का खेल बदस्तूर जारी है।”
खुलेआम घूम रहे गुनहगार, अवैध कारोबार को ‘गारंटी’
जिस रसूखदार ने इस अवैध कॉम्प्लेक्स को खड़ा करवाया था, उसके साथी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। राजधानी में आज भी धड़ल्ले से सैकड़ों अवैध कॉम्प्लेक्स चल रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘सब ठीक है’ का एक अदृश्य प्रमाण पत्र मिल चुका है। यह प्रमाण पत्र कुछ और नहीं, बल्कि अगले हादसे तक सुरक्षित और बेखौफ होकर अवैध कारोबार करने की प्रशासनिक गारंटी है।
विकास नगर की झोपड़पट्टी: राख के ऊपर फिर बस गई बस्ती
लापरवाही की इंतहा सिर्फ अलीगंज तक सीमित नहीं है। विकास नगर की वह झोपड़पट्टी जो कुछ समय पहले आग में पूरी तरह स्वाहा हो गई थी, ठीक उसी जगह पर आज फिर से नई झोपड़पट्टी बस चुकी है। हैरानी की बात यह है कि रोजाना वहां से गुजरने वाले अधिकारियों को अब यह फिर से दिखाई नहीं दे रही है। शायद यहां भी प्रशासन को फकत एक और नए हादसे का इंतजार है।
NHRC के नोटिस को भी ठेंगे पर रखा!
इस पूरे मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी कड़ा रुख अपनाया था। आयोग ने अलीगंज की इस मल्टी-स्टोरी कमर्शियल बिल्डिंग (जिसमें कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी चल रही थी) में आग से सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) न होने को लेकर लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस कमिश्नर से ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ (ATR) मांगी थी। लेकिन बेहद शर्मनाक बात है कि आज तक इस संबंध में क्या कार्रवाई हुई, इसकी कोई भी जानकारी मीडिया या जनता के सामने नहीं आ सकी है।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक मासूमों की जान की कीमत पर अफसरों की जेबें भरती रहेंगी और लखनऊ का प्रशासनिक तंत्र कुंभकर्णी नींद सोता रहेगा?











