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उग्र प्रदर्शन में शामिल होना और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना देशद्रोह नहींरू पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट

चंडीगढ़।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है कि किसी उग्र प्रदर्शन में शामिल होना या सरकार के विरोध में नारे बुलंद करना अपने आप में देशद्रोह का अपराध नहीं है। न्यायालय ने कहा कि हिंसा भड़काने या तोड़फोड़ करने जैसी हरकतों पर दंगा फैलाने के मामले तो दर्ज हो सकते हैं, लेकिन महज इसी आधार पर किसी नागरिक के सिर देशद्रोह का ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता। न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज और न्यायमूर्ति सुखविंदर कौर की दो सदस्यीय पीठ ने यह अहम बात हरियाणा सरकार की एक अपील को खारिज करते हुए कही। सरकार ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें चार लोगों को बरी कर दिया गया था। इन चारों पर आरोप था कि अगस्त 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा मिलने के बाद इन्होंने कैथल के कलायत में आगजनी और तोड़फोड़ की थी।
न्यायाधीशों ने कहा कि लोकतंत्र के भीतर सरकार के कामकाज या उसकी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना लोगों का अधिकार है। इसे किसी भी तरह सत्ता के प्रति नफरत या बगावत नहीं समझा जाना चाहिए। पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया, ” हिंसक प्रदर्शन कभी भी दंगे की शक्ल अख्तियार कर सकता है, लेकिन सिर्फ हिंसा होने का मतलब यह नहीं कि वहां सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने या देशद्रोह की साजिश रची जा रही थी। हमारे जैसे चुनी हुई सरकार वाले देश में केवल नारेबाजी के दम पर किसी पर देशद्रोह का ठप्पा नहीं लगाया जा सकता।”
अदालत ने कहा कि सिस्टम के खिलाफ नाराजगी या निराशा होना अलग बात है और देश के खिलाफ नफरत फैलाना अलग। चूंकि देशद्रोह एक बेहद गंभीर आरोप है और इसमें सजा भी सख्त है, इसलिए अदालतों का यह फर्ज बनता है कि वे केवल कयासों के आधार पर नहीं, बल्कि पुख्ता गवाहों और सुबूतों को देखकर ही कोई फैसला लें। यह पूरा विवाद करीब नौ साल पुराना है, जब राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद पूरे हरियाणा में अशांति फैल गई थी। पुलिस का आरोप था कि कलायत में बिजली दफ्तर को फूंकने वाली भीड़ में ये चार आरोपी भी शामिल थे। निचली अदालत ने गवाहों की कमी के कारण इन्हें छोड़ दिया था, जिस फैसले को अब उच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी पक्ष इन आरोपियों की पहचान साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। पुलिस की फाइल में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जो यह दिखाये कि इन लोगों ने देश की सुरक्षा को खतरे में डालने या वहां जानबूझकर बड़ी हिंसा भड़काने का काम किया था।

Ami News
Author: Ami News

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