प्रदूषण पर महाप्रहार: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, हरियाणा में भरेगी रफ्तार

देश में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए भारत सरकार ने परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दौर के बाद अब भविष्य के सबसे शक्तिशाली और सस्ते ईंधन ‘हाइड्रोजन’ से ट्रेनें चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ऐतिहासिक कड़ी में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी मिल गई है, जो जल्द ही हरियाणा की धरती पर दौड़ती नजर आएगी।
जींद से सोनीपत के बीच तय करेगी 89 किमी का सफर
यह ऐतिहासिक और अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच ट्रैक पर उतरेगी। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, करीब 89 किलोमीटर लंबे इस रूट पर यह 10 कोच वाली ट्रेन रोजाना दो राउंड ट्रिप लगाएगी। यानी हर दिन यह ट्रेन कुल 356 किलोमीटर की दूरी तय कर यात्रियों को सफर कराएगी।

चमत्कारी तकनीक: धुएं की जगह निकलेगी सिर्फ पानी की भाप
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खूबी इसकी हैरान कर देने वाली तकनीक है। ट्रेन में जहरीले धुएं का नामोनिशान नहीं होगा। ट्रेन में रखी हाइड्रोजन गैस और बाहर की ऑक्सीजन के बीच एक रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) कराई जाती है। इस रिएक्शन से बिजली पैदा होगी, जिससे ट्रेन की मोटर चलेगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाय-प्रोडक्ट (अवशेष) के रूप में जहरीली गैसों के बजाय केवल पानी की भाप बाहर निकलेगी, जो इसे पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल बनाती है।
डीजल और सीएनजी से कहीं ज्यादा पावरफुल
ताकत और ऊर्जा के मामले में हाइड्रोजन गैस ने अन्य सभी पारंपरिक ईंधनों को कोसों पीछे छोड़ दिया है। वैज्ञानिक आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 किलोग्राम हाइड्रोजन से उतनी ही ऊर्जा मिलती है जितनी 4.5 किलोग्राम डीजल या लगभग 3 से 4 किलोग्राम सीएनजी से मिलती है। इस हाई एनर्जी आउटपुट के कारण ट्रेन को न सिर्फ बेहतरीन पिकअप मिलेगा, बल्कि इसकी टॉप स्पीड भी शानदार होगी।

जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ: पेट्रोल-सीएनजी से आधा होगा खर्च
विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआत में हाइड्रोजन के उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन की लागत थोड़ी अधिक जरूर है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद यह सीएनजी से भी सस्ती पड़ेगी।
चूंकि हाइड्रोजन को पानी से अलग करके आसानी से बनाया जा सकता है, इसलिए भारत को ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आने वाले समय में जैसे ही इसके रिफ्यूलिंग स्टेशन बढ़ेंगे, इसका रनिंग कॉस्ट पेट्रोल और सीएनजी कारों के मुकाबले आधा रह जाने की उम्मीद है। भारत की यह ‘क्लीन एनर्जी लीप’ न केवल देश के परिवहन क्षेत्र की सूरत बदलेगी, बल्कि आम जनता को बेहद सस्ता, सुरक्षित और आधुनिक सफर भी मुहैया कराएगी।








