पठानकोट के सरकारी स्कूलों की बदली सूरत: निजी स्कूलों को दे रहे हैं मात, आधुनिक सुविधाओं से लैस हुए बच्चे

पठानकोट: क्या सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों से बेहतर हो रहे हैं? क्या आज सरकारी स्कूलों में बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ एक अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है? मुख्यमंत्री भगवंत मान के हालिया बयानों के बाद इन सुलगते सवालों के जमीनी सच को तलाशने के लिए हमारी टीम पठानकोट के टांगरी रोड स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल (प्राइमरी स्कूल) में ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहुँची।
जहाँ टीम ने देखा कि जमीनी स्तर पर सरकार के दावे कितने सच साबित हो रहे हैं और किस प्रकार बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है।
निजी स्कूलों जैसे ठाट, डिजिटल तकनीक से हो रही पढ़ाई
स्कूल की मुख्य अध्यापिका (हेड टीचर) शिवानी जी से जब हमारी टीम ने बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि आज के सरकारी स्कूल किसी भी बड़े प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं। स्कूल में बच्चों के लिए हर वह आधुनिक सुविधा उपलब्ध है जिसके लिए अभिभावक निजी स्कूलों में भारी-भरकम फीस चुकाते हैं।
स्कूल की मुख्य विशेषताएं और सुविधाएं:
-
- डिजिटल क्लासरूम: स्कूल में स्मार्ट पढ़ाई के लिए LED स्क्रीन्स और प्रोजेक्टर लगाए गए हैं, जिनकी मदद से बच्चे आधुनिक तरीके से दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम से पढ़ रहे हैं।
- शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर: बच्चों के बैठने के लिए बेहतरीन बेंच, डेस्क और आधुनिक फर्नीचर मौजूद हैं।
- प्री-प्राइमरी सेक्शन: छोटे बच्चों के खेलने और सीखने के लिए विशेष किंडरगार्टन सेक्शन बनाया गया है, जिसमें खिलौने, चार्ट्स और आकर्षक वातावरण उपलब्ध है।
- कंप्यूटर लैब और स्पोर्ट्स: बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कंप्यूटर शिक्षा और खेलकूद (Sports) की उचित व्यवस्था है।
- मिड-डे मील: बच्चों को रोजाना पौष्टिक और साफ-सुथरा भोजन दिया जा रहा है।
“निजी स्कूल सिर्फ बड़े-बड़े झूठे दावे करते हैं, जबकि पंजाब सरकार के प्रयासों से आज हमारे सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्रोजेक्टर और LED स्क्रीन पर बच्चे प्ले-वे मेथड (खेल-खेल में शिक्षा) से पढ़ रहे हैं।” > — शिवानी, मुख्य अध्यापिका

उच्च शिक्षित स्टाफ और विशेष प्रशिक्षण
निजी और सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के फर्क को स्पष्ट करते हुए शिक्षिका ने बताया कि सरकारी स्कूलों का स्टाफ M.A. और B.Ed. डिग्री धारक होने के साथ-साथ बेहद अनुभवी और उच्च शिक्षित है। सरकार द्वारा समय-समय पर अध्यापकों के लिए सेमीनार आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा BMTs (ब्लॉक मास्टर ट्रेनर्स) और मेंटर्स लगातार स्कूल का दौरा करते हैं, जो शिक्षकों को यह गाइड करते हैं कि बच्चों की आंतरिक प्रतिभा को बाहर (Output) कैसे लाना है।
2002 से 2026: बदल गई स्कूल की नुहार
स्कूल की एक अन्य शिक्षिका गुरविंदर कौर जी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि साल 2002 के समय इस स्कूल की स्थिति बेहद जर्जर थी, जहाँ केवल दो कमरे हुआ करते थे। लेकिन आज सरकार और विभाग के प्रयासों से स्कूल की पूरी नुहार (कायाकल्प) बदल चुकी है। अब लोग सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने से डरते नहीं हैं, बल्कि गर्व महसूस करते हैं।

अभिभावकों से अपील
ग्राउंड जीरो पर हमारी टीम ने देखा कि बच्चे क्लासरूम में गोल घेरा (सर्कल) बनाकर बहुत ही अनुशासित और खुशनुमा माहौल में पढ़ाई कर रहे थे। शिक्षक पूरी लगन से बच्चों को पढ़ाते दिखे, जो आम जनता में सरकारी स्कूलों के प्रति बने भ्रम और वहम को पूरी तरह से तोड़ता है। स्कूल प्रशासन ने आम जनता और अभिभावकों से अपील की है कि वे निजी स्कूलों की महंगी फीस के जाल में फंसने के बजाय अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं, जहाँ मुफ़्त और विश्वस्तरीय शिक्षा दी जा रही है।








