शिमला
हिमाचल में वन विभाग मिशन 32 को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अब लिए नई तकनीक अपनाने जा रहा है। इसके तहत पौधा रोपण अभियान में सीड बॉल्स का इस्तेमाल करने जा रहा है। शुरुआत में ट्रायल बेस पर इस तकनीक को बिलासपुर जिला में अपनाने का फैसला लिया है। आगामी दिनों में इस पर काम आरंभ हो जाएगा। तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आते है, तो भविष्य में विभाग इस तकनीक को पूरे प्रदेश में उपयोग में लाएगा। वन विभाग ने इस वर्ष पौधारोपण अभियान के तहत करीब आठ हजार हेक्टेयर भूमि पर 50 लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य तय किया है। इनमें राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अलावा अन्यों के तहत भी इस कार्य को किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने मंडल स्तर पर तैयारियां भी युद्धस्तर पर आरंभ कर दी है। वन विभाग इस अभियान में एक नई तकनीक को अपनाने जा रहा है।
सीड बॉल्स नामक तकनीक के माध्यम से पौधों के बीज को गीली मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण के साथ गोल आकार दिया जाएगा। इन्हें सुखाने के बाद जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में इसे बिखेरा जाएगा। मानसून सीजन में बारिश होने पर इससे मिलने वाली नमी से बीज खुद ही अंकुरित होगा और बाद में यह पौधे का रूप ले लेगा। पता चला है कि वन विभाग बिलासपुर जिला के बंदला धार क्षेत्र में इस तकनीक को अपनाने जा रहा है। विभाग का कहना है कि यह ट्रायल सफल रहता है, तो इस तकनीक को प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जाएगा। विभाग ने आरंभिक तौर पर पांच हजार सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इनमें अमलतास और नीम के बीजों का उपयोग किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक रूप से ज्यादा से ज्यादा पौधे विकसित हो सकें और हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सके। उधर, प्रिंसीपल चीफ कंजर्वेटर आफ फारेस्ट डा. संजय सूद का कहना है कि विभाग ट्रायल बेस पर सीड बॉल्स तकनीक को बिलासपुर जिला में अपनाने जा रहा है। उनका कहना है कि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस पर काम किया जाएगा।








