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स्मार्टफोन बना ‘सट्टे का अड्डा’: युवाओं में तेजी से बढ़ रही जुए की लत, सरकार और परिवारों को होना होगा सतर्क

युवाओं में तेजी से बढ़ रही जुए की लत, विज्ञापनों और ऑनलाइन सट्टेबाजी ने बढ़ाया संकट

विशेषज्ञों की चेतावनी: कम उम्र में शुरुआत बनी मानसिक और आर्थिक बर्बादी का कारण; सख्त सरकारी नियंत्रण और पारिवारिक सतर्कता बेहद जरूरी।

​आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन और ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते चलन ने जुए को घर-घर तक पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युवाओं में कम उम्र में जुए (Gambling) की लत लगने का खतरा खतरनाक स्तर पर बढ़ रहा है। हाल ही में आए एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में 8% से अधिक वयस्क जुए के दुष्प्रभावों से प्रभावित हैं, जबकि 1% वयस्क अत्यधिक जोखिम वाले स्तर पर हैं।

​सबसे चिंताजनक स्थिति 18 से 34 वर्ष के युवाओं की है। इस आयु वर्ग में नियमित रूप से ‘पोकी’ (पोकर मशीन) और ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले लगभग 90% लोगों को भारी आर्थिक नुकसान, रिश्ते टूटने और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

​🧠 दिमाग का खेल और ऑनलाइन कंपनियों का जाल

​विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क के विकास की प्रक्रिया के कारण युवाओं में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है। इस उम्र में छोटा सा इनाम मिलने पर भी मस्तिष्क में ‘डोपामिन’ (Dopamine) नामक रसायन का स्राव तेजी से होता है, जो लत को बढ़ाता है।

​इसके अलावा, ऑनलाइन सट्टेबाजी कंपनियां उपयोगकर्ताओं का ‘बड़ा डेटा’ (Big Data) एकत्र कर उनका विस्तृत प्रोफाइल तैयार करती हैं और फिर उन्हें आकर्षक, लक्षित विज्ञापन (Targeted Ads) दिखाकर जाल में फंसाती हैं। वर्तमान में खेल प्रतियोगिताओं के दौरान दिखाए जाने वाले आक्रामक विज्ञापन युवाओं की भावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

​📉 जुए की लत के घातक परिणाम: केवल पैसे नहीं, परिवार भी डूबता है

​अध्ययन में साफ कहा गया है कि जुए से होने वाला नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं होता। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक व्यवहार संबंधी विकार (Behavioral Disorder) माना है।

    • आर्थिक बर्बादी: जीवनभर की बचत और मकान तक गंवाने की नौबत।
    • मानसिक रोग: पछतावा, अपराधबोध, शर्म, अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety)। शोध के अनुसार, यह आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ाता है।
    • पारिवारिक बिखराव: जुए की लत के कारण घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद और बच्चों की उपेक्षा व दुर्व्यवहार के मामले बढ़े हैं।

“जितनी कम उम्र में कोई व्यक्ति जुआ खेलना शुरू करता है, वयस्क होने पर उसके लती बनने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।” — शोधकर्ता

​🛠️ समाधान: उपचार संभव, लेकिन ‘सामाजिक कलंक’ बनी बाधा

​राहत की बात यह है कि जुए की लत का इलाज संभव है। संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy – CBT) जैसी उपचार पद्धतियां नकारात्मक सोच और व्यवहार को बदलने में मदद करती हैं। हालांकि, सामाजिक कलंक और शर्म के डर से अधिकांश लोग इलाज के लिए आगे नहीं आते।

​📋 क्या हैं बचाव के उपाय?

정 सरकार को क्या करना होगा?

      • ​जुए और सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर तत्काल कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।
      • ​उद्योग के नियमन (Regulation) के लिए अधिक प्रभावी और सख्त कानून बनाए जाएं।

👨‍👩‍👧‍👦 परिवारों और माता-पिता के लिए मार्गदर्शिका

​विशेषज्ञों ने परिवारों से अपील की है कि वे जुए को खेल का स्वाभाविक हिस्सा न बनने दें। माता-पिता निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

    • सकारात्मक संवाद: बच्चों के साथ खेलों पर बात करते समय केवल मनोरंजन, खेल भावना और मस्ती पर ध्यान केंद्रित करें।
    • स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: रात 8:30 बजे के बाद खेल प्रसारण देखने से बचें, क्योंकि इस समय के बाद जुए के विज्ञापनों के प्रसारण की छूट होती है।
    • डिजिटल लॉकिंग: बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर पर जुए की वेबसाइटों, ऐप्स और भुगतान (Payment) को प्रतिबंधित करने वाले ऑनलाइन टूल्स और पेरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें।
Ami News
Author: Ami News

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