बड़ी खबर: कफ सिरप और हेल्थ टॉनिक से नशे पर सरकार का कड़ा प्रहार

नए नियम लागू: 12% से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाएं अब बिना पर्ची के नहीं मिलेंगी; सरकार ने ‘Schedule H1’ में किया शामिल
नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देश में दवाओं के जरिए होने वाले नशे और उनके अवैध दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत, जिन भी ओरल (पीने वाली) दवाओं में अल्कोहल की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक होगी, उन्हें अब बिना डॉक्टर की पर्ची (Prescription) के नहीं खरीदा जा सकेगा। सरकार ने ऐसी सभी दवाओं को Schedule H1 कैटेगरी में डाल दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले का सीधा और व्यापक असर मार्केट में बिकने वाले कफ सिरप (खांसी की दवा) और हेल्थ-प्रमोटिंग टॉनिकों पर पड़ेगा।

आखिर क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
दरअसल, पिछले कुछ समय से देश के कई हिस्सों से अल्कोहल और कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नशे के तौर पर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। युवा और नशेड़ी इन दवाओं का इस्तेमाल नशे के विकल्प के रूप में कर रहे थे। इसके अलावा, इन दवाइयों की बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी के मामले भी सामने आए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बीते कुछ सालों में देश के विभिन्न राज्यों में कफ सिरप के साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभावों) के कारण बच्चों की मौत की कई दुखद घटनाएं भी हुई थीं। इन सभी अवैध गतिविधियों और मौतों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 (Drugs Rules, 1945) में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए इसे अपडेट किया है।
क्या हैं नए नियम और गाइडलाइंस?
इन दवाओं पर लागू होगा नियम: > यह नियम केवल उन ओरल लिक्विड दवाओं पर लागू होगा जिनमें अल्कोहल की मात्रा 12% से ज्यादा है और जो 30ml से बड़ी बोतल या पैक में बेची जाती हैं।

मेडिकल स्टोर्स के लिए कड़े निर्देश:
नए Schedule H1 के कड़े नियमों के तहत अब मेडिकल स्टोर संचालकों की जवाबदेही तय कर दी गई है। अब से दुकानदारों को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एक विशेष रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इस रजिस्टर में निम्नलिखित जानकारियां रखना अनिवार्य होगा:
- दवा खरीदने वाले मरीज का नाम और पता
- दवा लिखने वाले डॉक्टर का नाम
- बेची गई दवा की सटीक मात्रा (Quantity)
बाजार पर असर: इस फैसले के बाद अब कोई भी व्यक्ति सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर खांसी की दवा या टॉनिक मनमाने ढंग से नहीं खरीद पाएगा। जानकारों का मानना है कि इस कदम से दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी पर काफी हद तक रोक लगेगी।








