लगातार हाई ब्लड शुगर से कमजोर हो सकती हैं नसें, ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ का बढ़ता है खतरा; समय पर जांच न कराने से पैर गंवाने तक की आ सकती है नौबत।

डायबिटीज (मधुमेह) को अक्सर लोग सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी समझते हैं, लेकिन सच यह है कि यह साइलेंट किलर शरीर के कई अंगों को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर को नियंत्रित न किया जाए, तो इसका सीधा असर शरीर की नसों और रक्त संचार (Blood Circulation) पर पड़ता है। इस बीमारी का सबसे घातक और पहला असर मरीज के पैरों पर दिखाई देता है, जिसे अनदेखा करना बेहद भारी पड़ सकता है।
क्या है डायबिटिक न्यूरोपैथी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में लगातार शुगर का स्तर हाई रहने से पैरों तक जाने वाली नसें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। चिकित्सा की भाषा में इस स्थिति को ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ कहा जाता है। इसके कारण पैरों में खून का बहाव ठीक से नहीं हो पाता, जिससे पैरों की संवेदनशीलता खत्म होने लगती है और छोटी सी चोट भी गंभीर रूप ले लेती है।

पैरों में दिखने वाले 5 चेतावनी संकेत (Warning Signs):
अखबार के पाठकों के लिए डॉक्टरों ने पैरों में दिखने वाले इन प्रमुख लक्षणों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है:
- पैरों में झुनझुनी और सूनापन: अगर आपको पैरों में लगातार झुनझुनी महसूस हो रही है या छूने पर स्पर्श का एहसास कम हो रहा है, तो यह डायबिटीज का शुरुआती संकेत हो सकता है।
- तेज दर्द और जलन: कई मरीजों को पैरों के तलवों में जलन, सुइयां चुभने जैसा अहसास और खासकर रात के समय असहनीय तेज दर्द का सामना करना पड़ता है।
- घाव का जल्दी ठीक न होना: डायबिटीज के मरीजों में पैर पर लगा एक छोटा सा कट या छाला भी जल्दी ठीक नहीं होता। खून का संचार कम होने के कारण यह घाव धीरे-धीरे सड़ने लगता है और गंभीर संक्रमण (Infection) का रूप ले लेता है।
- पैरों में सूजन और लालपन: अगर पैरों में बिना किसी वजह के सूजन, लालपन या गर्माहट महसूस हो रही है, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन का सीधा संकेत है।
- चलते समय पिंडलियों में दर्द: यदि आपको थोड़ा सा चलने पर भी पैरों या पिंडलियों में तेज दर्द होता है और बैठने या आराम करने पर वह ठीक हो जाता है, तो समझ लें कि पैरों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच रहा है।

विशेषज्ञों की सलाह: समय रहते जांच ही एकमात्र बचाव
डॉक्टरों का कहना है: “डायबिटीज के मरीजों को रोज रात में सोने से पहले अपने पैरों का बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए। अगर पैरों में कोई भी बदलाव, सूजन या घाव दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज न मिलने से संक्रमण इतना बढ़ सकता है कि सर्जरी करके पैर का वह हिस्सा काटने (Amputation) तक की नौबत आ सकती है। सतर्कता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।”








