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पठानकोट सिविल अस्पताल में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, बुजुर्ग महिला को नहीं मिली व्हीलचेयर; एसएमओ ने दी सफाई

पठानकोट सिविल अस्पताल में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, बुजुर्ग महिला को नहीं मिली व्हीलचेयर; एसएमओ ने दी सफाई

पठानकोट: जिला पठानकोट के सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की कथित नाकामियों और लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले अस्वस्थ, दिव्यांग और बुजुर्ग मरीजों को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर के लिए खुद ही जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

​हाल ही में अस्पताल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें चलने-फिरने में असमर्थ एक बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर न मिलने के कारण उनके परिजन खुद ही सहारा देकर ले जाने पर मजबूर दिखे। जब वहां मौजूद एक काउंटर (जिसे लोग हेल्पलाइन समझ रहे थे) पर व्हीलचेयर की उपलब्धता के बारे में पूछा गया, तो वहां तैनात कर्मचारी ने साफ मना कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

एसएमओ ने दी सफाई: कहा, वह हेल्पलाइन नहीं बल्कि ‘एनसीडी’ काउंटर है

​इस पूरे मामले को लेकर जब सिविल अस्पताल के एसएमओ (Senior Medical Officer) डॉ. सुनील चंद से बात की गई, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस काउंटर को लेकर भ्रम फैला है, वह कोई हेल्पलाइन डेस्क नहीं बल्कि एनसीडी (Non-Communicable Diseases) काउंटर है। उन्होंने कहा कि व्हीलचेयर या स्ट्रेचर का संबंध उस काउंटर से नहीं होता है।

अस्पताल में 30 से 40 व्हीलचेयर और स्ट्रेचर हर समय उपलब्ध

​एसएमओ डॉ. सुनील चंद ने बताया कि अस्पताल के हर वार्ड में, चाहे वह इमरजेंसी हो, मेल वार्ड हो या फीमेल वार्ड, मरीजों की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में करीब 30 से 40 व्हीलचेयर और इतने ही स्ट्रेचर हर समय मौजूद रहते हैं और यह सेवा 24 घंटे (24×7) चालू रहती है।

मरीज सीधे डॉक्टरों या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से करें संपर्क

एसएमओ ने मरीजों और उनके परिजनों से अपील की है कि यदि किसी को भी व्हीलचेयर या स्ट्रेचर की जरूरत हो, तो वे सीधे इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर से या वहां मौजूद क्लास-फोर (चतुर्थ श्रेणी) के सहायक कर्मचारियों व सफाई सेवकों से संपर्क कर सकते हैं। मरीजों की मदद के लिए हर वार्ड में स्टाफ तैनात रहता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में किसी मरीज को कोई समस्या आती है, तो वे सीधे अधिकारियों से भी शिकायत कर सकते हैं।

Ami News
Author: Ami News

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