कैंसर के छिपे हुए दुश्मन: रोज़मर्रा की ये 10 चीज़ें बन सकती हैं जानलेवा, WHO की चेतावनी
लाइफस्टाइल, पर्यावरण और संक्रमण के रूप में हमारे आसपास मौजूद हैं ‘ग्रुप 1 कार्सिनोजेन’; ऑन्कोलॉजिस्ट ने दी सतर्क रहने की सलाह।

कैंसर हमेशा किसी एक बड़ी वजह से नहीं होता। कई बार इसके पीछे ऐसी कई छोटी-छोटी चीज़ें होती हैं जिन्हें हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर पर रिसर्च करने वाली संस्था IARC (International Agency for Research on Cancer) ने कुछ ऐसे गंभीर जोखिम कारकों की पहचान की है, जिनके इंसानों में कैंसर पैदा करने के पुख्ता वैज्ञानिक सबूत मिले हैं। इन्हें “ग्रुप 1 कार्सिनोजेन” (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) की श्रेणी में रखा गया है।
क्या कहती हैं एक्सपर्ट? > “WHO ने कई ऐसे तत्वों को ग्रुप 1 कार्सिनोजेन माना है, जिनका कैंसर से सीधा संबंध साबित हो चुका है। ये हमारे आसपास लाइफस्टाइल, पर्यावरण या इन्फेक्शन के रूप में मौजूद हैं। इनसे बचाव ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” > – डॉ. वर्तिका विश्वानी, जानी-मानी ऑन्कोलॉजिस्ट
WHO के अनुसार: कैंसर का कारण बनने वाले टॉप 10 बड़े कारक
वैज्ञानिक शोधों के आधार पर नीचे दी गई 10 चीज़ें कैंसर के खतरे को सबसे ज़्यादा बढ़ाती हैं:
1. तंबाकू और धूम्रपान उत्पाद (가장 큰 दुश्मन)
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का के साथ-साथ चबाने वाला तंबाकू जैसे गुटखा और खैनी कैंसर के सबसे बड़े ज़िम्मेदार हैं। भारत में यह समस्या बेहद गंभीर है। यह आदत मुंह, गले, फेफड़े, भोजन नली और मूत्राशय (Bladder) का कैंसर पैदा करती है।
2. शराब का सेवन
ज्यादा शराब पीने से लीवर, मुंह, गला, स्तन (Breast) और आंतों में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, शराब की कोई भी मात्रा सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती।
3. प्रोसेस्ड मीट (प्रसंस्कृत मांस)
सॉसेज, बेकन, सलामी और डिब्बाबंद मीट को कैंसर के जोखिम से जोड़ा गया है। इसके नियमित सेवन से बड़ी आंत (कोलोरेक्टल कैंसर) का खतरा काफी बढ़ जाता है।
4. एस्बेस्टस (Asbestos)
यह एक ऐसा खतरनाक पदार्थ है जो पहले कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्यों) में खूब इस्तेमाल होता था। इसके महीन कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर बैठ जाते हैं, जिससे ‘मेसोथेलियोमा’ नामक लाइलाज और गंभीर कैंसर हो सकता है।

5. UV किरणें (सूरज की तेज धूप)
तेज धूप या टैनिंग मशीनों से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट (परा बैंगनी) किरणों के लगातार संपर्क में रहने से त्वचा (स्किन) कैंसर का खतरा बढ़ता है। धूप में निकलते वक्त सनस्क्रीन लगाना और शरीर को ढकना बेहद जरूरी है।
6. वायु प्रदूषण (Air Pollution)
प्रदूषित हवा में मौजूद हानिकारक और सूक्ष्म कण (PM 2.5) जब लगातार सांस के जरिए शरीर में जाते हैं, तो ये फेफड़ों के कैंसर का कारण बनते हैं। WHO इसे बेहद गंभीर पर्यावरण जोखिम मानता है।
7. डीजल वाहनों का धुआं
डीजल इंजन से निकलने वाला काला धुआं भी कार्सिनोजेनिक है। सड़कों पर या ऐसी जगहों पर जहाँ डीजल का धुआं ज्यादा हो, वहाँ लगातार रहने से फेफड़ों की बीमारियां और कैंसर हो सकता है।
8. आर्सेनिक युक्त पानी
कई इलाकों में जमीन के नीचे के पानी (Groundwater) में आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक होती है। ऐसा दूषित पानी लंबे समय तक पीने से त्वचा, फेफड़ों और मूत्राशय का कैंसर होने का खतरा रहता है।
9. हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण
ये दोनों वायरस धीरे-धीरे लीवर को डैमेज करते हैं। अगर इनका इलाज न किया जाए, तो ये आगे चलकर लीवर कैंसर में बदल जाते हैं। हालांकि, समय पर वैक्सीनेशन (टीकाकरण) और इलाज से इससे बचा जा सकता है।

10. सुपारी और पान मसाला
सिर्फ तंबाकू ही नहीं, बल्कि सादी सुपारी या पान मसाला चबाने की आदत भी कैंसर का कारण बनती है। IARC के मुताबिक, यह खासकर मुंह, जीभ और गले को प्रभावित करती है। यदि सुपारी के साथ तंबाकू भी मिला हो, तो यह नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।
बचाव के लिए क्या करें?
- तंबाकू, गुटखा और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- ताजे फल, सब्जियां खाएं और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
- प्रदूषण और तेज धूप से बचने के लिए मास्क और सनस्क्रीन का प्रयोग करें।
- हेपेटाइटिस बी का टीका अवश्य लगवाएं और पानी की जांच करवाकर ही पिएं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और जन-जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने या चिकित्सीय फैसले के लिए हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।)








