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NH-44 पर जल निकासी व्यवस्था ठप: PWD की लापरवाही से मानसून में जलभराव और हादसों का खतरा

नैशनल हाईवे 44 पर मंडराया जलभराव का खतरा: PWD की लापरवाही आ सकती है सामने

पठानकोट:  नैशनल हाईवे 44 (NH-44), जो जम्मू और अमृतसर जैसे दो मुख्य शहरों को आपस में जोड़ता है, पर आगामी मानसून के दौरान जलभराव (Water Logging) का एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही इस हाईवे पर जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

​स्प्लिट्स में फंसा कूड़ा-कचरा, निकासी ठप

​पीडब्ल्यूडी (PWD) और एनएचएआई (NHAI) द्वारा फुटपाथ के साथ बनाए गए ड्रेनेज स्प्लिट्स (जल निकासी के छेद) इस समय पूरी तरह से मिट्टी, गाद और कूड़े-कचरे से पटे पड़े हैं। सफाई न होने के कारण बारिश का पानी सड़कों से बाहर नहीं निकल पाएगा, जिससे हाईवे पर भारी जलभराव होने की पूरी आशंका है।

​हादसों को न्योता दे रही प्रशासन की सुस्ती

​इस नैशनल हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार सामान्यतः 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। ऐसे में यदि सड़क पर पानी जमा होता है, तो तेज रफ्तार वाहनों के अनियंत्रित होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। यह स्थिति टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर दोनों ही चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या कहता है जमीनी सच?

“बारिश आने के बाद जलभराव की समस्या का समाधान ढूंढने या सफाई करने का कोई फायदा नहीं है। प्रशासन को मानसून आने से पहले ही इन सभी स्प्लिट्स की सफाई करानी चाहिए ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।”

राक्षन डेविड, स्थानीय संवाददाता

​जनता की मांग: समय रहते जागे पीडब्ल्यूडी

​स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों से पुरजोर अपील की है कि वे इस खबर का संज्ञान लें और तुरंत प्रभाव से हाईवे के सभी ड्रेनेज सिस्टम की साफ-सफाई सुनिश्चित करें, ताकि मानसून के दौरान लोगों को सुरक्षित सफर मिल सके।

Ami News
Author: Ami News

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