संयुक्त किसान मोर्चा का बड़ा ऐलान: 22 जुलाई को पंजाब के सभी टोल प्लाजा होंगे फ्री, भाजपा नेताओं के घरों का घेराव

केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यापार नीतियों के खिलाफ पंजाब में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) पंजाब ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में एक बड़े राष्ट्रव्यापी संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। मोर्चे ने ऐलान किया है कि आगामी 22 जुलाई को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पूरे राज्य में सभी टोल प्लाजा पूरी तरह से फ्री करवाए जाएंगे और इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख नेताओं के घरों के बाहर कड़े धरने दिए जाएंगे।

’कॉर्पोरेट्स के आगे घुटने टेक रही सरकार’
किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार दूसरे देशों के साथ ऐसे व्यापार समझौते कर रही है जिससे देश की संप्रभुता और घरेलू अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा। नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार कॉर्पोरेट्स और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए देश का विशाल बाजार विदेशी निवेशकों के हवाले कर रही है। ग्लोबल कैपिटल और बेलगाम विदेशी व्यापार के इस फैलाव से भारत का घरेलू मार्केट और इकॉनमी पूरी तरह तबाह हो जाएगी, जिसका सबसे सीधा और घातक असर देश के आम नागरिकों पर पड़ेगा।
खेती और डेयरी सेक्टर पर मंडराया संकट
मोर्चे के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस वार्ता में कहा:
”केंद्र सरकार देश की जनता से असलियत छिपा रही है। विदेशी व्यापार और समझौतों की आड़ में हमारे कृषि (खेतीबाड़ी) और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी सरकार व वहां की कंपनियों के सामने आत्म-समर्पण के लिए छोड़ दिया गया है। अगर ये समझौते लागू होते हैं, तो भारत का पूरा खेतीबाड़ी सेक्टर और उससे जुड़े सहायक धंधे (जैसे डेयरी व पशुपालन) पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।”

22 जुलाई को 3 घंटे का ‘चक्का जाम’ और प्रदर्शन
किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि 22 जुलाई को होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए एक कड़ी चेतावनी होगा। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच राज्य का कोई भी टोल टैक्स नहीं वसूला जा सकेगा। किसानों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इस संघर्ष में उनका साथ दें, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं बल्कि देश की आर्थिक आजादी को बचाने की लड़ाई है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए पंजाब के सभी जिलों में कमेटियां गठित कर दी गई हैं और गांवों में लामबंदी शुरू हो चुकी है।








