पठानकोट के सीमावर्ती इलाकों में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, ग्रामीणों में दहशत

पठानकोट के सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लगातार बढ़ रहे पानी के स्तर के कारण आसपास के गांवों के लोग गहरे डर और चिंता के साए में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ ने उनका सब कुछ उजाड़ दिया था। उस दौरान खेत, बाग-बगीचे, घर और दुकानें पूरी तरह पानी में डूब गई थीं। कई परिवारों ने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया, और स्थिति इतनी भयानक थी कि कुछ लोगों के शव तक नहीं मिल पाए थे।
बोरोयों से बने अस्थाई बांध हुए जर्जर
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले साल आई आपदा के समय समाज सेवी संस्थाओं ने आगे आकर रेत की बोरियों से अस्थाई बांध (धुस्सी बांध) बनाया था, जिससे उस समय तो कुछ राहत मिली थी। लेकिन अब, एक साल बीत जाने के बाद, वे बोरियां पूरी तरह सड़ और खराब हो चुकी हैं। इसके चलते नदी का पानी फिर से गांवों के भीतर दाखिल होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

”सिर्फ दिखावा करने आती है सरकार” – ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित क्षेत्र के निवासियों का प्रशासन के प्रति भारी रोष है। प्रभावित गांव पोला और चाटका के रहने वाले लोगों ने बताया:
”यहाँ कई बार सरकारी स्तर पर सर्वे करने के लिए टीमें आईं। सरकार की ओर से 90 करोड़ रुपये मंजूर होने की बात भी अखबारों में कही गई थी। लेकिन धरातल पर न तो वह पैसा दिखा और न ही कोई काम हुआ। अधिकारी सिर्फ दिखावा करने आते हैं।”

एक अन्य ग्रामीण ने सड़कों की दुर्दशा पर बात करते हुए कहा कि चाटका को जोड़ने वाली सड़क पर बने पुल और रास्ते टूटे पड़े हैं, जहाँ गाड़ियां पलट रही हैं। जब प्रशासन सड़कों पर मिट्टी नहीं डलवा पा रहा, तो इतने बड़े दरिया को रोकना उनके बस की बात नहीं लग रही। बोरियां और रस्सियां टूट चुकी हैं, जो पानी के तेज बहाव का झटका बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।
50 से अधिक गांवों पर डूबने का खतरा
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार बारिश तेज हुई और पानी का स्तर बढ़ा, तो हालात पिछले साल से भी ज्यादा बदतर हो जाएंगे। इस खतरे की जद में एक-दो नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 50 गांव हैं, जिनके डूबने का अंदेशा बना हुआ है।

पक्के बांध के निर्माण की मांग
स्थानीय निवासियों ने सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि बारिश का मौसम पूरी तरह सक्रिय होने और बाढ़ का संकट गहराने से पहले यहाँ एक मजबूत और स्थाई बांध (तुस्सी बांध) का निर्माण किया जाए। ताकि सीमावर्ती गांवों के लोगों की जान-माल और फसलों की सुरक्षा की जा सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और लोगों की सुरक्षा के लिए कब तक जमीनी कार्रवाई शुरू की जाती है।








