पठानकोट में बड़ा खुलासा: सेना क्षेत्र के पास सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्ज़ा, नगर निगम पर ₹500 महीना वसूली का आरोप

पठानकोट: पठानकोट के डलहौजी रोड पर भू-माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा खेल सामने आया है। यहाँ सेना (Army) के सुरक्षित क्षेत्र के बिल्कुल नजदीक सरकारी जमीनों पर खुलेआम अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कब्जों के पीछे खुद नगर निगम पठानकोट के अधिकारियों और स्थानीय ठेकेदारों की संलिप्तता के आरोप लगे हैं।
झुग्गी-झोपड़ी बनाकर लाखों का रेंट वसूल रहे हैं ‘ठेकेदार’
डलहौजी रोड स्थित शनि देव मंदिर के पास का पूरा इलाका अवैध झुग्गी-झोपड़ियों के गढ़ में तब्दील हो चुका है। शहर के ही कुछ रसूखदार लोग यहाँ ‘ठेकेदार’ बनकर अवैध रूप से झुग्गियां और पक्के मकान तैयार करवा रहे हैं। इन झुग्गियों को बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को 1500 से 2000 रुपये प्रति माह के किराए पर दिया जा रहा है। इसके अलावा, यहाँ रहने वाले लोग लाखों रुपये मूल्य का सामान और प्रोडक्ट्स भी बेच रहे हैं, जिससे यह साफ है कि यह सिर्फ गरीबी का मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित व्यापार है।

नगर निगम पर लगा हर महीने ₹500 की अवैध वसूली का आरोप
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान यहाँ रह रहे प्रवासियों ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। झुग्गीवासियों ने कैमरे पर स्वीकार किया कि:
”नगर निगम (कमेटी) के दफ्तर वाले यहाँ आते हैं और हमसे हर महीने ₹500 की वसूली करके जाते हैं। पैसे लेने के बाद वे हमें यहाँ रहने की अनुमति दे देते हैं।”
जब इन प्रवासियों से इनके दस्तावेजों के बारे में पूछा गया, तो उनके पास न तो कोई आधार कार्ड था और न ही वोटर कार्ड। वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और वर्तमान में लुधियाना और पठानकोट के इस बेहद संवेदनशील इलाके में बिना किसी वैध पहचान के पिछले 20-25 सालों से रह रहे हैं।

सेना की सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
यह पूरा अवैध कब्जा मिलिट्री एरिया (Cantt Area) के बिल्कुल पास हो रहा है। ऐसे में बिना किसी पहचान पत्र (ID Card) के सैकड़ों प्रवासियों का सेना के बेस के पास रहना पठानकोट और देश की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल किसी बड़ी सुरक्षा चूक को बुलावा दे सकता है।
प्रशासन से तीखे सवाल:
- देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील सेना क्षेत्र के पास इस तरह के अवैध निर्माणों को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है?
- क्या नगर निगम के आला अधिकारी इस बात से वाकिफ हैं कि उनके कर्मचारी सरकारी जमीन पर कब्जे के बदले ₹500 महीना वसूल रहे हैं?
- बिना आधार कार्ड और पहचान पत्र के रह रहे इन संदिग्ध लोगों की जांच पुलिस और प्रशासन द्वारा क्यों नहीं की गई?
स्थानीय निवासियों ने अब इस मामले में पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर इस भू-माफिया और भ्रष्टाचार के गठजोड़ पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।








