अवैध हथियारों की बड़ी खेप बरामद: सीमा पार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार
अत्याधुनिक 10 पिस्तौल और जिंदा कारतूस जब्त; विदेश में बैठे आका के इशारे पर काम कर रहा था गिरोह

अमृतसर: कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से संचालित होने वाले अवैध हथियारों के एक बड़े तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह के 4 सक्रिय आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 10 अत्याधुनिक पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह पूरा नेटवर्क विदेश में बैठे एक कुख्यात तस्कर के इशारे पर काम कर रहा था।
सीमा पार से आती थी खेप, अपराधियों को होती थी सप्लाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी सीमा पार (ड्रोन या अन्य माध्यमों) से भेजी जाने वाली हथियारों की अवैध खेप को रिसीव करते थे। इसके बाद इन हथियारों को पंजाब और आसपास के राज्यों में सक्रिय आपराधिक तत्वों और गैंगस्टरों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस को मजबूत आशंका है कि इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित संगठित अपराध और राष्ट्रविरोधी तत्वों से जुड़े हो सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
- बरामदगी: 10 अत्याधुनिक पिस्तौल और जिंदा कारतूस।
- गिरफ्तारी: तस्करी नेटवर्क से जुड़े 4 मुख्य आरोपी।
- कनेक्शन: विदेश में बैठा मास्टरमाइंड संभाल रहा था कमान।
- कार्रवाई: थाना छेहरटा और मकबूलपुरा में मामले दर्ज।

थाना छेहरटा और मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए अमृतसर के थाना छेहरटा और थाना मकबूलपुरा में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस की विशेष टीमें अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को एक-दूसरे से जोड़ने में जुट गई हैं। तफ्तीश के दौरान मुख्य रूप से इस बात का पता लगाया जा रहा है कि हथियारों की यह खेप सीमा के किस पार से और कैसे आई, इन्हें किन-किन अपराधियों तक पहुंचाया जाना था और इस काले कारोबार में स्थानीय स्तर पर इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त था।

जल्द होंगी और गिरफ्तारियां: पुलिस
कमिश्नरेट पुलिस का कहना है कि आरोपियों से सघन पूछताछ जारी है। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि इस जांच के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। पुलिस फिलहाल विदेश में बैठे मुख्य तस्कर और उसके स्थानीय मददगारों (लोकल संपर्कों) की पहचान करने में जुटी है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।








