पठानकोट: मिशन रोड का चिल्ड्रंस पार्क बदहाली का शिकार, नशेडियों का बना अड्डा
स्थानीय निवासियों और पूर्व पार्षद ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा, सुधार की मांग

पठानकोट : वार्ड नंबर 9 के अंतर्गत आने वाला मिशन रोड का चिल्ड्रंस पार्क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। शहर की शान कहे जाने वाले इस पार्क की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिससे स्थानीय निवासियों और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

टूटे झूले और हादसों को दावत देते गड्ढे
पार्क में लगे बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले पूरी तरह से टूट चुके हैं और उनके नीचे गहरे गड्ढे बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ रोज बच्चे खेलने आते हैं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत (लाइव वीडियो के माध्यम से) करने के बाद भी प्रशासन आँखें मूंदे बैठा है।

रात होते ही नशेडियों का गढ़ बन जाता है पार्क
स्थानीय बुजुर्गों और सैर करने आने वाले लोगों ने एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाते हुए बताया कि रात के समय यह पार्क नशेडियों का अड्डा बन जाता है। सुबह के समय यहाँ जगह-जगह नशे की चुटकियां (पॉउच), पानी की बोतलें और अन्य आपत्तिजनक सामान बिखरा मिलता है, जिसे खुद यहाँ आने वाले लोग साफ करते हैं। लोगों ने मांग की है कि पार्क की सुरक्षा के लिए यहाँ परमानेंट सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाएं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: न माली, न लाइटें
पूर्व पार्षद अश्विनी कुमार और अन्य निवासियों (सुशील कुमार आदि) ने बताया कि:
- माली की कमी: पार्क में कोई स्थाई माली नहीं है। हरी घास पूरी तरह गायब हो चुकी है। पार्क में जो भी हरियाली या पानी की व्यवस्था है, वह यहाँ आने वाले लोग खुद अपने स्तर पर करते हैं।
- बंद पड़ी लाइटें: पार्क में लगी बड़ी फ्लड लाइटें पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ी हैं। नगर निगम द्वारा जो सोलर लाइटें लगाई गई हैं, वे भी पेड़ों के पीछे छिप जाने के कारण ठीक से चार्ज नहीं हो पातीं।
- खराब स्पीकर: पार्क में बजने वाले म्यूजिक सिस्टम के सारे स्पीकर खराब हो चुके हैं।
दोपहर में हो क्रिकेट का समय निर्धारित
बुजुर्गों ने यह भी मांग उठाई कि सुबह और शाम के समय जब वरिष्ठ नागरिक और छोटे बच्चे पार्क में होते हैं, तब युवाओं द्वारा क्रिकेट खेलने से गेंद लगने का डर रहता है। इसलिए क्रिकेट खेलने का समय केवल दोपहर में निर्धारित किया जाना चाहिए।
जनता की आवाज: > “यह पार्क हमारे शहर की शान है। पार्क अच्छा होगा तो बच्चों और बुजुर्गों की सेहत ठीक रहेगी, लेकिन प्रशासन ने इसे लावारिस छोड़ दिया है। हमारी मांग है कि यहाँ पक्के काम किए जाएं, न कि सिर्फ खानापूर्ति।” — स्थानीय निवासी








