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​पठानकोट का ‘लाइटों वाला चौक’ बना सफेद हाथी, बंद पड़ी लाइटों से लोग परेशान

पठानकोट का ‘लाइटों वाला चौक’ बना सफेद हाथी, बंद पड़ी ट्रैफिक लाइटों से लोग परेशान

 

पठानकोट : पठानकोट के प्रमुख चौराहों पर प्रशासन द्वारा लाखों रुपये की लागत से लगाई गई ट्रैफिक लाइटें आज ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही हैं। शहर का प्रसिद्ध ‘लाइटों वाला चौक’ (गांधी चौक) और ममुन चौक इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जहाँ लाइटें लगने के बाद भी हमेशा बंद रहती हैं। इसके चलते शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।

​जाम और हादसों का मुख्य केंद्र बना गांधी चौक

​गांधी चौक, जिसे लोग ‘लाइटों वाले चौक’ के नाम से भी जानते हैं, वहाँ ट्रैफिक लाइटें सुचारू रूप से काम नहीं कर रही हैं। यहाँ ढांगू रोड, गुरदासपुर रोड और डलहौजी रोड जैसी मुख्य सड़कों से आने वाला भारी ट्रैफिक एक साथ जमा हो जाता है। लाइटें बंद होने के कारण वाहन चालक किसी भी दिशा से गलत तरीके से ओवरटेक करते हैं, जिससे हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। पुलिसकर्मी मौके पर तैनात तो रहते हैं, लेकिन बिना लाइटों के अकेले ट्रैफिक को नियंत्रित करना उनके लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

​ममुन चौक की भी हालत खस्ता

​यही स्थिति ममुन चौक की भी है, जहाँ लंबे समय से ट्रैफिक लाइटें बंद पड़ी हैं। यहाँ डलहौजी रोड की तरफ जाने वाले वाहनों की भारी कतारें लग जाती हैं। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि प्रशासन ने लाइटें लगाकर सिर्फ ‘खानापूर्ति’ की है, जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

“सिस्टम तो बना दिया जाता है, लाइटें भी लगवा दी जाती हैं, लेकिन फायदा क्या जब वे हमेशा बंद ही रहें?”

​स्कूल-कॉलेज खुलने पर स्थिति होती है विकराल

​स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने बताया कि सामान्य दिनों में तो जाम रहता ही है, लेकिन जब स्कूल और कॉलेजों की छुट्टी या शुरू होने का समय होता है, तब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो जाती है। ऊपर से चिलचिलाती गर्मी में लोग घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं।

​स्थानीय लोगों की जुबानी:

  • रोहित महाजन (स्थानीय निवासी): “इन लाइटों को लगे कम से कम 10-12 साल से ऊपर का समय हो चुका है। जब ये लगी थीं, तब कुछ ही दिन चलीं और उसके बाद से हमेशा बंद ही हैं। लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिला।”
  • पंकज (स्थानीय दुकानदार): “मैं पिछले 20 सालों से यहाँ देख रहा हूँ। लाइटें एक बार शुरू हुई थीं, पर महीना-दो महीना चलकर बंद हो गईं। अगर ये लाइटें नियमित रूप से चलें, तो ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक सुधर सकती है। प्रशासन को इसे जल्द से जल्द शुरू करवाना चाहिए।”

​स्थानीय जनता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन चौराहों की ट्रैफिक लाइटों को तुरंत ठीक करवाकर चालू किया जाए ताकि रोजाना होने वाले हादसों और इस भयानक जाम से निजात मिल सके।

Ami News
Author: Ami News

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