पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन पर महीनों से बंद पड़ा एस्केलेटर, यात्री परेशान
‘गेटवे ऑफ जम्मू-कश्मीर’ कहे जाने वाले स्टेशन पर बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है भारी असुविधा; दूसरी तरफ सिर्फ सीढ़ियों का सहारा

पठानकोट: पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाए गए एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) अब उनके लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। स्टेशन के एक तरफ का एस्केलेटर पिछले करीब ढाई से तीन महीनों से लगातार बंद पड़ा है। इस वजह से स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, स्टेशन पर जाने की साइड वाला एस्केलेटर तो सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन दूसरी तरफ का एस्केलेटर मेंटेनेंस (रखरखाव) न होने के कारण महीनों से ठप है। इसके चलते यात्रियों को भारी-भरकम सामान हाथों में उठाकर फुट ओवरब्रिज और सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है।
‘गेटवे ऑफ जम्मू-कश्मीर’ में ऐसी लापरवाही क्यों?
पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन को ‘गेटवे ऑफ जम्मू-कश्मीर’ भी कहा जाता है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाली तमाम प्रमुख ट्रेनें इसी स्टेशन से होकर गुजरती हैं। इतने महत्वपूर्ण और व्यस्त रेलवे स्टेशन पर इस प्रकार की असुविधा होना रेलवे प्रशासन के दावों पर बड़े सवाल खड़े करती है। यात्रियों का कहना है कि इस खराबी के संबंध में कई बार ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन मेंटेनेंस का काम कब पूरा होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

एक तरफ एस्केलेटर, तो दूसरी तरफ सिर्फ सीढ़ियां
यात्रियों ने स्टेशन के दूसरे हिस्से की बनावट पर भी सवाल उठाए हैं। स्टेशन के दूसरी तरफ एस्केलेटर की कोई व्यवस्था ही नहीं है और यात्रियों के लिए सिर्फ और सिर्फ सीढ़ियां ही बनाई गई हैं। ऐसे में दिव्यांगों, मरीजों और बुजुर्गों के लिए इतनी लंबी सीढ़ियां चढ़ना और उतरना किसी चुनौती से कम नहीं होता। यात्रियों की मांग है कि बंद पड़े एस्केलेटर को तुरंत चालू किया जाए और स्टेशन के दूसरी तरफ भी एस्केलेटर की सुविधा दी जाए ताकि यात्रियों का सफर सुगम हो सके।
यात्रियों का दर्द: “हम भारी सामान लेकर सफर करते हैं। जब रेलवे ने सुविधा दी है, तो उसे चालू भी रखना चाहिए। बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सीढ़ियां चढ़ना बेहद मुश्किल काम है।”








