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AMI News: स्पेस में संबंध बनाने और प्रेगनेंसी पर क्यों है पाबंदी? नासा के नियमों के पीछे का विज्ञान

स्पेस में संबंध बनाने और प्रेगनेंसी पर क्यों है पाबंदी? नासा के नियमों के पीछे का विज्ञान

इंसान के लिए अंतरिक्ष (Space) हमेशा से ही रहस्य और रोमांच का केंद्र रहा है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर जाने वाले मिशनों में महिला और पुरुष दोनों ही वैज्ञानिक शामिल होते हैं, जो कई महीनों तक एक साथ एक बंद स्पेस स्टेशन में वक्त बिताते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या अंतरिक्ष में शारीरिक संबंध (Physical Relations) बनाए जा सकते हैं?

​अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के नियम इस मामले में बेहद सख्त हैं। नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को स्पेस में ऐसा करने की बिल्कुल इजाजत नहीं देता। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंतरिक्ष में किसी महिला का प्रेग्नेंट होना न सिर्फ एक गैर-जिम्मेदाराना कदम है, बल्कि वहां का माहौल एक अजन्मे बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मुख्य वजहें:

मिशन कोई पिकनिक नहीं, बेहद जटिल काम

​वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में मिशन पर जाना कोई पिकनिक नहीं बल्कि बेहद जटिल और अनुशासित काम है। स्पेस में संबंध बनाने और प्रेगनेंसी को रोकने के लिए कड़े नियम लागू हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि इंसानी शरीर पर अंतरिक्ष के वातावरण का क्या-क्या बुरा असर पड़ता है, इसके बारे में हम अभी भी पूरी तरह नहीं जानते हैं। अब तक के शोध बताते हैं कि स्पेस का माहौल इंसानी सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में वहां किसी नए जीवन (भ्रूण) की प्रक्रिया शुरू करना बेहद खतरनाक हो सकता है।

कॉस्मिक रेडिएशन और जीरो ग्रेविटी का डबल खतरा

​चिकित्सा विशेषज्ञों (Medical Experts) का कहना है कि जैविक रूप से अंतरिक्ष में गर्भधारण (Pregnancy) तो संभव है, लेकिन इसके परिणाम बेहद भयानक हो सकते हैं।

    • भयानक रेडिएशन: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) न के बराबर होती है और वहां खतरनाक ब्रह्मांडीय किरणें (Cosmic Radiation) बहुत ज्यादा होती हैं।
    • अपंगता का खतरा: यदि वहां कोई भ्रूण विकसित होता है, तो इस भयंकर रेडिएशन के कारण बच्चे में गंभीर शारीरिक या मानसिक अपंगता आ सकती है।
    • गर्भ में मौत का जोखिम: शून्य गुरुत्वाकर्षण और रेडिएशन के चलते गर्भ में ही बच्चे की मौत होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। छोटे कीड़ों पर किए गए स्पेस प्रयोग तो सफल रहे हैं, लेकिन इंसानों जैसे बड़े जीवों के लिए यह माहौल सुरक्षित होने का कोई प्रमाण नहीं है।

जीरो ग्रेविटी के साइड-इफेक्ट्स

बिना ग्रेविटी के अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने पर वैज्ञानिकों के शरीर में कई खतरनाक बदलाव आते हैं। शरीर पर गुरुत्वाकर्षण का दबाव न होने से मांसपेशियों के टिश्यू खत्म होने लगते हैं और हड्डियां खोखली होने लगती हैं। बिना ग्रेविटी के शरीर में खून का बहाव बुरी तरह प्रभावित होता है। हालांकि, खून का यह बहाव जैविक रूप से संबंध बनाने में कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन शरीर की बाकी दिक्कतें इस प्रक्रिया को लगभग नामुमकिन बना देती हैं।

न्यूटन का नियम और प्राइवेसी की कमी बनती है बाधा

​नासा में 30 साल से ज्यादा सेवा दे चुके पूर्व इंजीनियर जोनाथन मिलर ने अंतरिक्ष में संबंध बनाने की व्यावहारिक (Practical) दिक्कतों का खुलासा किया है। उनके अनुसार:

      1. भौतिकी की चुनौती (Physics Challenge): जीरो ग्रेविटी में न्यूटन का नियम (हर क्रिया की विपरीत और बराबर प्रतिक्रिया होती है) लागू होता है। ऐसे में पार्टनर्स का एक जगह टिक पाना असंभव है। तैरते हुए शरीर को संभालने के लिए कपल्स को अपने पैरों को किसी बेल्ट या चीज से लगातार बांधकर रखना होगा।
      2. प्राइवेसी का न होना: स्पेस स्टेशन के भीतर जगह बेहद सीमित (कम) होती है। वहां हर वक्त वैज्ञानिक मिशन के काम में जुटे होते हैं, जिसके कारण किसी भी यात्री को अकेले रहने के लिए कोई प्राइवेसी मिलना पूरी तरह नामुमकिन है।

    • नो प्राइवेसी: ISS पर जगह बेहद कम होती है, हर वक्त वैज्ञानिकों की मौजूदगी के कारण प्राइवेसी शून्य होती है।
    • न्यूटन का नियम: जीरो-ग्रेविटी में तैरते शरीरों के कारण बिना बेल्ट के एक जगह टिकना नामुमकिन।
    • विकलांगता का डर: कॉस्मिक रेडिएशन से भ्रूण को गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान का खतरा।
Ami News
Author: Ami News

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