गुरदासपुर: कुदरती आफत ने छीना किसान का आशियाना और रोजगार, तूफान में दो मंजिला पोल्ट्री फार्म ढहा, लाखों का नुकसान
मलबे में दबे हजारों जिंदा पक्षी; घर और गाड़ियां भी हुईं क्षतिग्रस्त, पीड़ित ने सरकार से लगाई मुआवजे की गुहार

गुरदासपुर : सीमावर्ती जिले गुरदासपुर के गांव ‘घनी के बांगर’ में कल शाम आए भीषण तूफान ने एक गरीब किसान के सपनों और उसकी आजीविका को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। खेती के साथ-साथ साइड बिजनेस के तौर पर पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसान काबल सिंह का दो मंजिला पोल्ट्री शेड इस कुदरती आफत की भेंट चढ़ गया। इस हादसे में न सिर्फ पूरी इमारत जमींदोज हो गई, बल्कि शेड के भीतर मौजूद लाखों रुपये की कीमत के जिंदा पोल्ट्री जानवर मलबे में दबकर मर गए। पीड़ित किसान के मुताबिक, उन्हें सीधा 15 से 20 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है।

आंखों के सामने ढह गई मेहनत की कमाई
पीड़ित पोल्ट्री मालिक काबल सिंह ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि कल शाम करीब 6 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ली। देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए और इतनी तेज आंधी-तूफान आया कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। काबल सिंह ने रोते हुए कहा,
”मैंने बैंकों और लोगों से लाखों रुपये का कर्ज लेकर इस एक मंजिला शेड को दो मंजिला बनाया था ताकि परिवार का गुजर-बसर ठीक से हो सके। लेकिन मेरी आंखों के सामने ही पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मेरा सब कुछ खत्म हो गया।”

घरों और गाड़ियों को भी पहुंचा भारी नुकसान
तूफान की रफ्तार इतनी खौफनाक थी कि पोल्ट्री शेड का मलबा उड़कर कुछ दूरी पर स्थित काबल सिंह और उनके पड़ोसियों के घरों तक जा गिरा। मलबे की चपेट में आने से घरों की दीवारों और आंगन में खड़ी कार को भी भारी नुकसान पहुंचा है। चारों तरफ सिर्फ तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है।

गांववालों ने की पंजाब सरकार से मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पड़ोसी ग्रामीण हरपिंदर सिंह और गुरविंदर सिंह ने नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसान पहले से ही भारी कर्ज के नीचे दबा हुआ था और इस प्राकृतिक आपदा ने उसे पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि:
- घटनास्थल का तुरंत सरकारी सर्वे (विशेष गिरदावरी) करवाया जाए।
- पीड़ित किसान का कर्ज माफ किया जाए।
- उसे इस भारी नुकसान के एवज में उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए ताकि वह अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सके।








