सार्वजनिक जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के त्वरित व सस्ते समाधान के लिए ‘स्थायी लोक अदालत’ में करें अपील: सत्र न्यायाधीश
पठानकोट जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन रजनीश गर्ग ने दी जानकारी; कहा- कोर्ट के फैसले के बराबर मान्य होता है स्थायी लोक अदालत का निर्णय

पठानकोट, 7 जून: सार्वजनिक जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों का जल्दी, प्रभावी और सस्ते तरीके से निपटारा करने के लिए आम जनता को स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। यह बात जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण पठानकोट के चेयरमैन-सह-जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने कही।
उन्होंने बताया कि कानूनी सेवाएं प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी और कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2002 के तहत इन अदालतों की स्थापना की गई है, ताकि लोगों के मामलों को बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के सुलझाया जा सके।
दो सदस्यीय पीठ करती है मामलों की सुनवाई
सत्र न्यायाधीश ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थायी लोक अदालत एक चेयरमैन की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय अदालत है। इस अदालत ने अदालतों में लंबित जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े कई पुराने और नए मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया है।

इन सेवाओं से जुड़े मामलों की होती है सुनवाई:
स्थायी लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों की सुनवाई की जाती है:
- मूलभूत सुविधाएं: बिजली, पानी की आपूर्ति, डाक व टेलीफोन सेवाएं।
- यातायात व स्वास्थ्य: परिवहन संस्थान, अस्पताल और डिस्पेंसरी सेवाएं।
- वित्तीय व शिक्षा: बैंकिंग, बीमा, किराया, शिक्षा और नहर विभाग से संबंधित मामले।
- सरकारी योजनाएं व दस्तावेज: आधार कार्ड, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, बीपीएल (BPL) कार्ड जारी करना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, शगुन योजना, बेरोजगारी भत्ता और मानव संसाधन विकास से जुड़े विवाद।
1 करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई का अधिकार
न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने स्पष्ट किया कि जो मामले अभी तक किसी भी अदालत में लंबित नहीं हैं, उन्हें एक सादे कागज पर शिकायत लिखकर स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। यह अदालत 1 करोड़ रुपये तक की राशि से संबंधित विवादों की सुनवाई और उनका निपटारा करने का अधिकार रखती है।
अपील का कोई प्रावधान नहीं, फैसला अंतिम
सत्र न्यायाधीश ने बताया कि इन अदालतों में मामले बेहद सस्ते और बिना किसी अग्रिम (एडवांस) खर्च के सुलझाए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्थायी लोक अदालत के फैसलों को दीवानी अदालत (Civil Court) के डिक्री/फैसले के बराबर मान्यता प्राप्त है। इसके फैसले के खिलाफ कहीं भी कोई अपील दायर नहीं की जा सकती है, यानी इसका निर्णय अंतिम होता है।

उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे महंगी और लंबी अदालती कार्रवाई से बचकर त्वरित और प्रभावी न्याय पाने के लिए स्थायी लोक अदालत का बढ़-चढ़कर लाभ उठाएं।








