शातिर साइबर ठगों के निशाने पर बैंक अधिकारी: PNB डिप्टी मैनेजर के खाते से उड़ाए 10 लाख, CBI ने संभाली जांच

शिमला/पालमपुर : साइबर ठगों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सिर्फ आम जनता को ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की रग-रग से वाकिफ बैंक अधिकारियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से सामने आया है, जहां पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक डिप्टी मैनेजर के खाते से शातिर हैकर्स ने ₹10 लाख की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच, शिमला ने अज्ञात हैकर्स के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
OTP सिस्टम में लगाई सेंध, दो बार में उड़ाए ₹10 लाख
जानकारी के मुताबिक, यह सनसनीखेज घटना कांगड़ा जिले की पीएनबी राजनगर शाखा में तैनात डिप्टी मैनेजर देव राज शर्मा के साथ घटी। पीड़ित अधिकारी द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, 2 दिसंबर, 2024 को उनके बैंक खाते से उनकी बिना किसी जानकारी या अनुमति के 5-5 लाख रुपए के दो ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हो गए। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात साइबर ठगों ने किसी तरह डिप्टी मैनेजर के बैंकिंग क्रेडेंशियल (लॉगिन डिटेल्स) हासिल कर लिए और सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानी जाने वाली ओटीपी (OTP) प्रमाणीकरण प्रणाली में सेंध लगाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
एक्शन में बैंक: ₹2.70 लाख होने से बचाए
शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि ठगी गई ₹10 लाख की रकम दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इनमें से एक खाता एक्सिस बैंक (Axis Bank) का और दूसरा पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का था। शिकायत मिलते ही बैंक प्रबंधन ने तुरंत एक्शन लिया और संबंधित PNB खाते को फ्रीज (Freeze) कर दिया। गनीमत यह रही कि उस खाते में ₹2,70,488 मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया। हालांकि, शेष राशि को ठग पहले ही अन्य अज्ञात खातों में ट्रांसफर कर चुके थे।

पुलिस और साइबर सेल के बाद अब CBI के हवाले केस
डिप्टी मैनेजर देव राज शर्मा ने शुरुआत में इस धोखाधड़ी की रिपोर्ट चढियार पुलिस चौकी में दर्ज करवाई थी। मामले के हाई-टेक स्वरूप को देखते हुए इसे बाद में साइबर सेल, पालमपुर को सौंपा गया। लेकिन, इस वारदात के पीछे किसी गहरी आपराधिक साजिश और उन्नत साइबर तकनीक के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए अब इसकी कमान देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी ‘सीबीआई’ को सौंप दी गई है।
डिजिटल ट्रेल खंगाल रही CBI
CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti-Corruption Branch), शिमला ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर इंस्पेक्टर रविंदर कुमार को इस जटिल केस का जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
जांच का मुख्य फोकस: सीबीआई की टीम अब ठगों तक पहुंचने के लिए डिजिटल ट्रेल (Digital Trail), वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और जिन खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ है, उनकी गहन तकनीकी और फोरेंसिक जांच कर रही है।

इस हाई-प्रोफाइल घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बेहद उन्नत और नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों से बचने के लिए अब बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम जनता को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है।








