चम्बा जिला परिषद: भाजपा के हाथ से खिसकी सत्ता, 5 साल बाद कांग्रेस की बंपर वापसी

चम्बा: चम्बा जिले में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। जिला परिषद के हालिया चुनाव नतीजों ने सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका दिया है, जबकि कांग्रेस ने जोरदार वापसी करते हुए 5 साल बाद फिर से सत्ता की कमान संभाल ली है। कुल 18 सीटों वाले जिला परिषद में कांग्रेस ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जिसके बाद अब चम्बा जिला परिषद में कांग्रेस का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है।
सीटों का पूरा गणित: किसे क्या मिला?
चुनाव परिणामों के अनुसार, कांग्रेस ने विरोधी दलों को पछाड़ते हुए एकतरफा बढ़त बनाई है। कुल 18 सीटों में से कांग्रेस ने 10 सीटों पर कब्ज़ा किया है, जबकि भाजपा को महज 5 ही सीटें हाथ लगी हैं। वहीं, 3 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।
जीत-हार का वार्ड वार ब्यौरा
- कांग्रेस समर्थक विजेता वार्ड: सरोल, चकलू, खनी, सनवाल, चांजू, करवाल, बयाणा, किहार, नैनीखड्ड और मोतला।
- भाजपा समर्थक विजेता वार्ड: भरमौर, करयास, करियां, बनेट और कथेट।
- निर्दलीय विजेता वार्ड: बख्तपुर, जियूंता और गैहरा।

भाजपा का गणित फेल, निर्दलीयों के सहारे की कोशिश भी नाकाम
भाजपा ने इस चुनाव में 16 वार्डों पर अपने आधिकारिक प्रत्याशियों की घोषणा की थी, जिनमें से 13 वार्डों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, भाजपा अब भी निर्दलीयों पर अपना दावा जता रही है।
बख्तपुर वार्ड से निर्दलीय जीतीं इंदिरा कपूर को पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चम्बा सदर से टिकट दिया था (जिसे बाद में वापस ले लिया गया था)। वे भाजपा विचारधारा से जुड़ी हैं। इसके अलावा जियूंता वार्ड से मीनाक्षी कपूर और गैहरा वार्ड से निर्वाचित सुनील शर्मा का फिलहाल किसी को समर्थन नहीं है, लेकिन भाजपा उन पर अपना दावा जता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा इन तीनों निर्दलीयों को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब हो भी जाती है, तो भी उसका आंकड़ा केवल 8 (5 भाजपा + 3 निर्दलीय) तक ही पहुँचेगा। बहुमत के लिए न्यूनतम 10 सीटों की आवश्यकता है, जो अकेले कांग्रेस के पास पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में कांग्रेस के रास्ते की सारी अड़चनें दूर हो गई हैं।

5 साल बाद इतिहास ने खुद को दोहराया
यह चुनाव परिणाम पिछले जिला परिषद चुनाव के ठीक विपरीत है। पिछले चुनावों में भाजपा ने 10 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता हथियाई थी, जबकि कांग्रेस महज 5 सीटों पर सिमट गई थी (तब 1 सीट माकपा और 2 निर्दलीयों को मिली थी)। इस बार पासा पूरी तरह पलट चुका है और जो स्थिति पिछली बार कांग्रेस की थी, वैसी ही करारी शिकस्त इस बार भाजपा को झेलनी पड़ी है।
अब आगे क्या?
बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा हाथ में होने के कारण कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए किस चेहरे के नाम पर मुहर लगाती है।








