माकपा का बड़ा हमला: संजय गुप्ता को मुख्य सचिव बनाने की अटकलों पर जताया कड़ा विरोध

- संस्थागत शुचिता पर सवाल: माकपा राज्य सचिव संजय चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लिखा पत्र।
- अदालती कार्यवाही का हवाला: हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका और जारी नोटिस का किया जिक्र।
- गंभीर आरोप: चेस्टर हिल्स भूमि सौदा और 71 करोड़ के ट्रांसफार्मर खरीद मामले में घेरा।
शिमला हिमाचल प्रदेश के अगले मुख्य सचिव के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता की प्रस्तावित नियमित नियुक्ति और सेवा विस्तार की अटकलों ने राज्य में सियासी और प्रशासनिक पारा गरमा दिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस संभावित फैसले पर रविवार को कड़ा ऐतराज जताया है। माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने सरकार के इस कदम को प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत शुचिता पर एक गंभीर कुठाराघात बताया है।
सीएम सुक्खू को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग
माकपा नेता संजय चौहान ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उक्त अधिकारी को सेवा विस्तार या मुख्य सचिव जैसे शीर्ष पद पर नियुक्त करने के किसी भी फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। चौहान ने तर्क दिया कि जब एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और कदाचार के गंभीर आरोपों की न्यायिक जांच चल रही हो, तब ऐसी नियुक्ति पूरी तरह से अनुचित और अनैतिक है।

हाई कोर्ट के नोटिस का दिया हवाला
अपने बयान में संजय चौहान ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित जनहित याचिका (तिलक राज बनाम राज्य सरकार) का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अदालत ने ‘संस्थागत शुचिता’ से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर संज्ञान लेते हुए गत 19 मई को ही राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किए हैं। याचिका के मुताबिक, अधिकारी के खिलाफ तीन लंबित प्राथमिकी (FIR) और दो आपराधिक संदर्भ दर्ज हैं। ऐसे में उन्हें शीर्ष प्रशासनिक पद सौंपने से शासन में जनता का विश्वास डगमगाएगा।
“मुख्य सचिव का पद पूरी तरह ‘बेदाग छवि और उच्च नैतिक मानकों’ वाले अधिकारी की मांग करता है। गंभीर आरोपों और न्यायिक कार्यवाही के बीच ऐसी नियुक्ति प्रशासनिक विश्वसनीयता को खत्म कर देगी।” > — संजय चौहान, राज्य सचिव, माकपा

संजय गुप्ता पर लगे आरोपों का ब्योरा
माकपा ने अधिकारी के कार्यकाल के दौरान रहे विभिन्न विवादों और जांचों की सूची भी सामने रखी है:
- चेस्टर हिल्स सौदा: कथित बेनामी भूमि सौदों में अधिकारी का नाम सामने आने का आरोप।
- करोड़ों की खरीद में गड़बड़ी: ‘एचपीपीटीसीएल’ द्वारा करीब 71 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर की खरीद में अनियमितता।
- एकल-बोली का विवाद: लगभग 50 करोड़ रुपये की ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को एकल-बोली (Single-bid) के आधार पर आवंटित करने का आरोप। ये दोनों शिकायतें केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और राज्य सतर्कता अधिकारियों के पास लंबित हैं।
- 2009 का मामला: माकपा ने याद दिलाया कि साल 2009 में एक जांच एजेंसी द्वारा अधिकारी के वाहन से कथित तौर पर नकदी बरामद की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार और निलंबित भी किया गया था।
फिलहाल इस पूरे मामले पर राज्य सरकार या संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माकपा के इस कड़े रुख के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री सुक्खू के पाले में है।








