चंडीगढ़/मोहाली: विजीलैंस ब्यूरो रिश्वत कांड में सीबीआई अदालत का बड़ा फैसला
डीजीपी के रीडर ओ.पी. राणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने बिचौलिए विकास गोयल की अंतरिम राहत भी छीनी

- साहब को जाने थे ₹13 लाख: सीबीआई का कोर्ट में दावा– ₹20 लाख की रिश्वत में से बड़ी रकम ‘साहब’ के लिए तय थी।
- बीमारी का हवाला भी न आया काम: आरोपी विकास गोयल ने दिल और लीवर की बीमारी का दिया था वास्ता, कोर्ट से नहीं मिली राहत।
पंजाब विजीलैंस ब्यूरो रिश्वत कांड में नामजद आरोपियों को सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस के डीजीपी के रीडर ओ.पी. राणा की अग्रिम जमानत याचिका वीरवार को रद्द कर दी। इसके साथ ही, अदालत ने इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले मलोट निवासी विकास गोयल की अंतरिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है।
‘साहब’ तक पहुंचने की कुंजी है ओ.पी. राणा की गिरफ्तारी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में ओ.पी. राणा की गिरफ्तारी को बेहद अहम माना जा रहा है। सीबीआई ने अदालत के समक्ष पुरजोर तरीके से दावा किया है कि 20 लाख रुपये के इस रिश्वत कांड में ओ.पी. राणा की मुख्य भूमिका थी। सीबीआई के मुताबिक, राणा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि रिश्वत की कुल रकम में से “13 लाख रुपये साहब को जाने हैं।” जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह ‘साहब’ कौन हैं, जिसके नाम पर इतनी बड़ी रकम वसूली जा रही थी।

बीमारियों का हवाला देकर मांगी थी राहत
सुनवाई के दौरान बिचौलिए विकास गोयल के वकील के.पी. सिंह ने अदालत में दलील दी थी कि उनका मुवक्किल दिल (हार्ट), लीवर और रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। उन्हें लगातार विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी और इलाज की सख्त जरूरत है। इस याचिका पर अदालत ने पिछली सुनवाई में सीबीआई को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया था।
अदालत ने दलीलों को किया दरकिनार
वीरवार को हुई बहस के बाद विशेष अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपियों को राहत मिलने से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब ओ.पी. राणा और विकास गोयल पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

अब सुलग रहा है सवाल: कौन हैं वो ‘साहब’?
कानूनी गलियारों और पुलिस महकमे में अब सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि ओ.पी. राणा जिस ‘साहब’ का जिक्र कर रहे थे, वह कौन हैं? सूत्रों का कहना है कि राणा की हिरासत के बाद ही इस रिश्वत कांड के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ चेहरे का पर्दाफाश हो सकेगा।








