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20  मई  2026 आज का खास दिन

20  मई  2026 आज का खास दिन

इतिहास और शुरुआत
  • संयुक्त राष्ट्र की घोषणा: दिसंबर 2017 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) के सदस्य देशों ने स्लोवेनिया सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस घोषित करने की मांग की गई थी।
  • पहला आयोजन: आधिकारिक तौर पर पहला विश्व मधुमक्खी दिवस 20 मई 2018 को मनाया गया था।
  • 20 मई की तारीख ही क्यों? इस दिन को आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीकों के प्रणेता और स्लोवेनिया के प्रसिद्ध मधुमक्खी पालक एंटोन जान्सा (Anton Janša) का जन्म (20 मई 1734) हुआ था। [1, 2]
🌸 मधुमक्खियों का महत्व और परागण (Pollination) [1]
  • खाद्य सुरक्षा: दुनिया की लगभग 35 प्रतिशत फसल उत्पादन और मानव उपभोग के लिए फल या बीज पैदा करने वाली चार में से तीन फसलें पूरी तरह या आंशिक रूप से परागणकों पर निर्भर हैं।
  • जैव विविधता: मधुमक्खियाँ लगभग 90 प्रतिशत जंगली पुष्पीय पौधों की प्रजातियों के अस्तित्व को बनाए रखने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। [1]
🐝 मधुमक्खियों के सामने मुख्य खतरे
  • कीटनाशकों का उपयोग: खेती में रसायनों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से उनकी आबादी तेजी से घट रही है।
  • जलवायु परिवर्तन: मौसम के बदलते चक्र और बढ़ते तापमान के कारण उनके प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
  • शहरीकरण: प्राकृतिक वनस्पति और बाग-बगीचों की कमी के कारण उन्हें पर्याप्त भोजन (पराग और मकरंद) नहीं मिल पाता। [1]
🌱 हम क्या योगदान दे सकते हैं?
  • अपने बगीचे या बालकोनी में स्थानीय प्रजातियों के फूलदार पौधे लगाएं जो मधुमक्खियों को आकर्षित करें।
  • फसलों और घरेलू पौधों में रासायनिक कीटनाशकों के बजाय जैविक विकल्पों का उपयोग करें।
  • स्थानीय मधुमक्खी पालकों से प्राकृतिक शहद और उत्पाद खरीदें ताकि सतत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा मिले।

कैलेंडर के झरोखे से: इतिहास में आज का स्थान

​राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 मई का दिन कई ऐसी युगांतकारी घटनाओं का गवाह रहा है, जिन्होंने दुनिया का नक्शा और मानव जीवन का ढंग हमेशा के लिए बदल दिया।

​अंतरराष्ट्रीय इतिहास: जब वास्को डी गामा ने खोजा भारत का रास्ता

​अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर आज का दिन भौगोलिक और व्यावसायिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। 20 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने पहली बार समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट (अब कोझिकोड, केरल) पहुंचकर यूरोप और एशिया के बीच व्यापार के एक नए युग की शुरुआत की थी। इसी दिन वर्ष 1873 में लेवी स्ट्रॉस और जेकब डेविस को तांबे के रिवेट्स वाली नीली जींस का पेटेंट मिला था, जिसे आज हम ‘ब्लू जींस’ के रूप में पहचानते हैं। इसके अलावा, विज्ञान की दुनिया के लिए 20 मई 1990 का दिन खास था, जब हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष से पृथ्वी पर अपनी पहली तस्वीर भेजी थी।

​राष्ट्रीय इतिहास: एवरेस्ट पर तिरंगा और महापुरुषों का स्मरण

​भारत के लिए आज का दिन अदम्य साहस और गौरव का प्रतीक है। 20 मई 1965 को कमांडर एम. एस. कोहली के नेतृत्व में पहला भारतीय दल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहा था। साहित्य और राजनीति के क्षेत्र में भी आज का दिन अमिट है। आज ही के दिन सन 1900 में हिंदी साहित्य के महान छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म हुआ था। वहीं, देश की आजादी की लड़ाई में ‘लाल-बाल-पाल’ की तिकड़ी के अहम हिस्से रहे क्रांतिकारी बिपिन चंद्र पाल का निधन 20 मई 1932 को हुआ था, जिन्हें आज पूरा देश नमन कर रहा है।

​धार्मिक दृष्टि से विशेष: ज्येष्ठ अधिक मास का संयोग

​धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आज का दिन बेहद पवित्र और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। इस वर्ष विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ का महीना ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) के रूप में मनाया जा रहा है। शास्त्रों में अधिक मास के दौरान किए जाने वाले जप, तप और दान का महत्व सामान्य दिनों से सौ गुना अधिक बताया गया है।

​आज बुधवार को ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। बुधवार और चतुर्थी का यह अनूठा संयोग ‘विनायक श्री गणेश चतुर्थी’ के व्रत को और अधिक फलदायी बनाता है। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता के देव हैं, और बुधवार का दिन भी उन्हीं को समर्पित है। आज के दिन बप्पा की आराधना करने से जीवन के सभी संकट और अड़चनें दूर होती हैं।

​आज का पंचांग: शुभ मुहूर्त और ग्रह स्थिति

​सूर्योदय और चंद्रोदय के समय के अनुसार आज का विस्तृत पंचांग इस प्रकार है:

  • दिनांक: 20 मई 2026 (बुधवार)
  • विक्रम संवत: 2083 (नल नाम संवत्सर)
  • मास: ज्येष्ठ अधिक मास, शुक्ल पक्ष
  • तिथि: चतुर्थी तिथि (सुबह 11:06 बजे तक), इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ।
  • नक्षत्र: आर्द्रा नक्षत्र (सुबह 06:11 बजे तक), उसके पश्चात पुनर्वसु नक्षत्र।
  • योग: शूल योग (दोपहर 02:10 बजे तक), इसके बाद गंड योग।
  • करण: विष्टि/भद्रा (सुबह 11:06 बजे तक), उसके बाद बव करण।
  • सूर्य और चंद्र की स्थिति: सूर्य देव इस समय वृषभ राशि में विराजमान हैं, जबकि चंद्रमा रात 10:38 बजे तक मिथुन राशि में रहेंगे और फिर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।

​शुभ और अशुभ समय (नई दिल्ली के समयानुसार)

​दिन को व्यवस्थित और शुभ बनाने के लिए पंचांग के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 से 04:46 तक (साधना और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ)
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:45 तक (किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम)
  • राहुकाल: दोपहर 12:18 से 02:00 तक (इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचें)
  • भद्रा काल: सुबह 05:28 से 11:06 तक (भद्रा के समय मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं)

​आज विनायक चतुर्थी के पावन अवसर पर सुबह भद्रा की समाप्ति के बाद या दोपहर के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करना समृद्धि और सुख-शांति लेकर आएगा।

Ami News
Author: Ami News

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