केंद्र से पूरा फंड, फिर भी शिक्षा विभाग के 1007 कर्मचारियों की सैलरी कटी; मार्च से वेतन भी रोका
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां, अफसरशाही पर शोषण का आरोप

चंडीगढ़, 18 मई 2026: पंजाब के शिक्षा विभाग में कार्यरत 1007 दफ्तरी (क्लैरिकल) कर्मचारियों पर इस समय आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा है। केंद्र सरकार से पूरा फंड मिलने के बावजूद, शिक्षा विभाग द्वारा इन कर्मचारियों के वेतन में फरवरी 2026 से 21,000 रुपये से लेकर 31,000 रुपये तक की भारी कटौती कर दी गई है। सितम यहीं नहीं रुका, विभाग ने मार्च 2026 से इन कर्मचारियों की सैलरी पूरी तरह से रोक दी है, जिससे ये कर्मचारी और उनके परिवार दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं।

रेगुलर होने की मांग की मिली यह सजा!
मिले विवरणों के अनुसार, ये 1007 कर्मचारी पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं रेगुलर (पक्का) करने की मांग कर रहे थे। लेकिन सरकार ने उनकी जायज मांगों को पूरा करने के बजाय उनके वेतन पर ही कैंची चला दी। फरवरी में पहले 31-31 हजार रुपये का कट लगाया गया और अब मार्च से वेतन ही बंद कर दिया गया।
बच्चों की पढ़ाई और दाखिले के वक्त आर्थिक संकट में फंसे परिवार
कर्मचारियों ने रोष जताते हुए कहा कि यह समय बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं, नए एडमिशंस, स्कूल की किताबों और यूनिफॉर्म आदि का है। ऐसे नाजुक समय में सैलरी रोकना और उसमें भारी कटौती करना सीधे तौर पर उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

वित्त मंत्री के आश्वासन भी निकले खोखले
कर्मचारी जत्थेबंदियों के नेताओं ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वित्त मंत्री के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। हर मीटिंग में वित्त मंत्री ने बार-बार भरोसा दिलाया था कि सैलरी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग ने 24 फरवरी 2026 से सैलरी कटौती के आदेश लागू कर दिए।
अभी हाल ही में 13 मई 2026 को पंजाब भवन और सिविल सेक्रेटेरिएट में वित्त मंत्री के साथ दोबारा मीटिंग हुई, जहाँ एक बार फिर आश्वासन दिया गया कि कटौती रोककर मसले का समाधान निकाला जाएगा। लेकिन हकीकत में जमीन पर कुछ नहीं बदला और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी आज तक जारी नहीं हो सकी है।

कोर्ट के आदेशों की अवमानना का आरोप
कर्मचारियों के हक में उतरीं विभिन्न जत्थेबंदियों और यूनियन नेताओं ने सरकार व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेताओं का साफ कहना है कि:
- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों के हक में दी गई सख्त हिदायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
- कोर्ट के आदेशों के उलट जाकर सरकार की अफसरशाही इन बेकसूर कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण करने पर तुली हुई है।
कर्मचारियों की चेतावनी:
पीड़ित कर्मचारियों और जत्थेबंदियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही काटी गई सैलरी बहाल नहीं की गई और रुकी हुई तनख्वाह जारी नहीं हुई, तो वे तीखे संघर्ष के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और पंजाब सरकार की होगी।








