भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: नगर निगम की लापरवाही पर बिजली बोर्ड का डंडा, काटे जा रहे अवैध कनेक्शन

- एम.एस. फार्म रोड स्थित कमल विहार कॉलोनी और आसपास के इलाकों में बिजली बोर्ड की बड़ी कार्रवाई।
- बिना मीटर और बिना अनुमति ‘कुंडी’ लगाकर जलाई जा रही थीं 73 हजार से ज्यादा एलईडी लाइटें।
- बिजली बोर्ड का सख्त रुख: नगर निगम को भी अब प्रीपेड मीटर नीति के तहत आना होगा, वरना कटेंगे और कनेक्शन।
जालंधर : शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने का दावा करने वाला नगर निगम खुद एक बड़े बिजली घोटाले और लापरवाही के कटघरे में खड़ा हो गया है। शहर के एम.एस. फार्म रोड स्थित कमल विहार कॉलोनी और उसके आसपास के इलाकों से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ बिजली बोर्ड ने अवैध रूप से चल रहे स्ट्रीट लाइट कनेक्शनों को काटने की ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है।
कागजों पर ‘स्मार्ट’ योजना, जमीन पर भ्रष्टाचार का खेल
सूत्रों के अनुसार, कुछ साल पहले नगर निगम ने स्मार्ट सिटी कंपनी के माध्यम से पूरे शहर में आधुनिक एल.ई.डी. (LED) स्ट्रीट लाइट सिस्टम लगवाया था। इस प्रोजेक्ट के तहत शहर भर में लगभग 73 हजार लाइट प्वाइंट्स लगाए गए थे। दावा था कि इससे शहर रोशन होगा और बिजली की बचत होगी।
लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट में तारों, मीटरों और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर उचित खर्च ही नहीं किया गया। नतीजतन, यह पूरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। पिछले डेढ़ से दो सालों के दौरान, निगम के आला अधिकारियों ने नई-नई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें ठोकने पर तो पूरा जोर दिया, लेकिन सिस्टम को दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई।

बिना मीटर ‘कुंडी’ के भरोसे चल रहा था सिस्टम
हैरानी की बात यह है कि हजारों लाइटें लगने के बावजूद निगम ने न तो बिजली बोर्ड के पास आधिकारिक कनेक्शन के लिए कोई आवेदन किया और न ही नियमअनुसार मीटर लगवाए। आज भी शहर की अधिकांश स्ट्रीट लाइटें अवैध ‘कुंडी कनेक्शन’ के जरिए सीधे चालू हैं।
इस घोर लापरवाही का सीधा लोड बिजली बोर्ड के ट्रांसफार्मरों पर आ रहा है। इतना ही नहीं, इस लचर व्यवस्था की आड़ में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी को भी बढ़ावा मिल रहा है। बताया जा रहा है कि इलाके में होने वाले अधिकांश धार्मिक और निजी कार्यक्रमों में भी इसी अवैध लाइट कनेक्शन से सीधे बिजली खींच ली जाती है, जिससे राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

बिजली बोर्ड का अल्टीमेटम: प्रीपेड मीटर लगाओ या अंधेरे में रहो
अवैध लोड और घाटे से परेशान बिजली बोर्ड ने अब पूरी तरह सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बोर्ड के अधिकारियों का साफ कहना है कि सरकार की नीति के तहत सभी सरकारी विभागों में प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य है। इसी नीति के तहत अब नगर निगम के इस पूरे स्ट्रीट लाइट सिस्टम को भी प्रीपेड लूप में लाया जाएगा।
अधिकारी का बयान:
“हम अवैध कनेक्शन बर्दाश्त नहीं करेंगे। नगर निगम को तुरंत प्रीपेड नीति अपनानी होगी और मीटर लगवाने होंगे। यदि निगम प्रशासन ने जल्द ही नियमों का पालन नहीं किया, तो आने वाले दिनों में कनेक्शन काटने का यह सिलसिला और तेज किया जाएगा।”

बिजली बोर्ड की इस कार्रवाई के बाद अब कमल विहार और आसपास के इलाकों में अंधेरा छाने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में निगम प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। देखना यह होगा कि इस प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार पर नगर निगम के उच्च अधिकारी अब क्या सफाई देते हैं।








