बठिंडा: पुलिस की मौजूदगी में हुई गोलीबारी ने ली अकाली नेता निर्मल सिंह टीटू की जान
17 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में तोड़ा दम; इलाके में सनसनी, पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
मुख्य बिंदु:
- जमीन विवाद: करीबी रिश्तेदारों के साथ लंबे समय से चल रहा था जमीनी विवाद।
- साजिश का आरोप: मृतक के बेटे ने पुलिस इंस्पेक्टर और प्रभावशाली लोगों पर लगाया सुनियोजित साजिश का आरोप।
- प्रशासनिक लापरवाही: पीड़ित परिवार का दावा— 112 नंबर पर कॉल करने के बाद भी नहीं मिली कोई मदद।
- कार्रवाई: संगत मंडी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

बठिंडा/संगत मंडी: जिले के गांव गुरुसर सैणेवाला में बीते दिनों पुलिस की मौजूदगी में हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले ने आखिरकार एक बेहद दुखद मोड़ ले लिया है। इस खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के स्थानीय नेता निर्मल सिंह उर्फ टीटू ने शनिवार को दम तोड़ दिया। वह पिछले 17 दिनों से बठिंडा के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। अकाली नेता की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। वहीं, इस पूरी वारदात में पुलिस की संदिग्ध भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
खेत में ट्रैक्टर चलाते समय हुआ हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्मल सिंह टीटू का अपने ही कुछ करीबी रिश्तेदारों के साथ जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। आरोप है कि बीते 30 अप्रैल को फरीदकोट जिले के कोटकपूरा थाने से पुलिस की एक टीम सादे कपड़ों में कुछ बाहरी लोगों को साथ लेकर गांव गुरुसर सैणेवाला पहुंची थी। उस वक्त निर्मल सिंह खेत में ट्रैक्टर चला रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। इस बीच हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें से एक गोली सीधे टीटू के पेट में जा लगी। उन्हें अत्यंत गंभीर हालत में बठिंडा के अस्पताल में दाखिल कराया गया था, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

बेटे का आरोप: राजनीतिक दबाव में रची गई सुनियोजित साजिश
मृतक के पुत्र गोपी ने इस पूरी वारदात को एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश करार दिया है। गोपी ने पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
”एक पुलिस इंस्पेक्टर और कुछ रसूखदार लोगों ने राजनीतिक दबाव के चलते हमारे पिता के खिलाफ कोटकपूरा सिटी थाने में पहले ही एक झूठा मामला दर्ज करवाया था। वारदात वाले दिन सुबह ही हमारे रिश्तेदार कई गाड़ियों में हथियारों से लैस गुंडों और पुलिस टीम को साथ लेकर हमारे घर पर हमला करने पहुंचे थे।”

गोपी ने आगे बताया कि जब उन्होंने हालात बिगड़ते देखे, तो तुरंत मदद के लिए आपातकालीन नंबर ‘112’ पर कॉल की थी, लेकिन पुलिस प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि पुलिस तमाशबीन बनी रही और उसकी नाक के नीचे गोलियां चलाई गईं।

पुलिस ने दर्ज किया हत्या का मामला
निर्मल सिंह टीटू की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। थाना संगत मंडी पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज मामले में अब हत्या की धाराएं (IPC/BNS की प्रासंगिक धाराएं) जोड़ दी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जा रही है और कानून हाथ में लेने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पुलिसकर्मी ही क्यों न हो। फिलहाल गांव में एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।








