बदले की राजनीति: ‘आप’ छोड़ भाजपा में आए सांसदों ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के हालिया दलबदल के बाद पंजाब और दिल्ली की सियासत में उबाल आ गया है। मंगलवार को भाजपा में शामिल हुए सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। सांसदों ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में पंजाब की ‘आप’ सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और ‘प्रतिशोध की राजनीति’ (Vendetta Politics) करने का गंभीर आरोप लगाया है।
एजेंसियों के जरिए किया जा रहा टारगेट: राघव चड्ढा
राष्ट्रपति भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब सरकार उन सांसदों और नेताओं को निशाना बना रही है जिन्होंने पार्टी छोड़ी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
“जब तक हम पार्टी में थे, हमें कट्टर ईमानदार और सभ्य कहा जाता था। जैसे ही हमने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और पार्टी छोड़ी, हमें रातों-रात भ्रष्ट और गद्दार करार दे दिया गया। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”

भज्जी को कहा ‘देशद्रोही’, राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर रेड
चड्ढा ने चौंकाने वाले दावे करते हुए कहा कि पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह के घर के बाहर ‘गद्दार’ लिख दिया गया और उनके परिवार को डराया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने निम्नलिखित घटनाओं का जिक्र किया:
- संदीप पाठक पर FIR: सांसद संदीप पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।
- राजिंदर गुप्ता पर कार्रवाई: ट्राइडेंट ग्रुप के मालिक और सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर प्रदूषण बोर्ड और अन्य एजेंसियों के जरिए छापेमारी करवाई गई है।
- सुरक्षा में कटौती: पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की सुरक्षा हटाकर उन्हें असुरक्षित माहौल में धकेला जा रहा है।
“पंजाब में अब नहीं टिकेगी आप सरकार”
सांसद संदीप पाठक ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से संवैधानिक सुरक्षा की मांग की है। वहीं, राघव चड्ढा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह की बदले की राजनीति का अंत बहुत बुरा होता है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह से राज्य की जनता में रोष है और सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, उसे देखते हुए पंजाब में ‘आप’ सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

सियासी घमासान तेज
एक तरफ जहां चड्ढा और अन्य सांसद राष्ट्रपति से मिले, वहीं दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राष्ट्रपति से मिलकर इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने (Disqualification) की मांग की है। मान का तर्क है कि इन सांसदों ने जनता के भरोसे और दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है।
संपादकीय टिप्पणी: इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले दिनों में कानूनी और सियासी लड़ाई और तेज होने की उम्मीद है।








