देवी-देवताओं का अपमान करने वालों को अब नहीं बख्शा जाएगा: हिंदू तख्त जागरण सुधार मंडल

पठानकोट, 27 अप्रैल शहर में धार्मिक मर्यादाओं को बनाए रखने और देवी-देवताओं के स्वरूप के अपमान को रोकने के लिए ‘हिंदू तख्त जागरण सुधार मंडल पंजाब’ ने कमर कस ली है। सोमवार को पठानकोट में मंडल की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई कि जागरणों और धार्मिक कार्यक्रमों में मर्यादा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक
यह महत्वपूर्ण बैठक राधा कृष्ण संकीर्तन मंडली के संचालक एवं मंडल के जिला प्रधान राहुल तुली के विशेष प्रयासों से आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडल के जिला चेयरमैन सुरेश बिट्टा (प्रधान, अमर शहीद बाबा मोतीराम मेहरा कश्यप राजपूत सभा) ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रधान अश्विनी शर्मा, पंजाब प्रधान जगदीप शर्मा, अहमदगढ़ जिला प्रधान पवन बजाज, अमृतसर जिला प्रधान टिंकू जिंदल और लहरीगढ़ जिला प्रधान कार्तिक शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

झांकियों के लिए जारी हुए कड़े निर्देश
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अक्सर जागरणों और कीर्तनों में झांकी कलाकारों द्वारा देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर अभद्र प्रदर्शन किया जाता है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है। मंडल ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित निर्णय लिए:
- उम्र की सीमा: अब केवल 10 वर्ष तक की आयु के बच्चे ही देवी-देवताओं का स्वरूप बन सकेंगे।
- सख्त पाबंदी: 10 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी युवक या युवती देवी-देवता का रूप धारण कर नाच-गाना या किसी भी प्रकार का मजाक नहीं कर सकेगा।
- कानूनी कार्रवाई: यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित व्यक्ति और आयोजन समिति के खिलाफ सख्त कानूनी मोर्चा खोला जाएगा।
बायकाट और सहयोग की अपील
मंडल ने सभी जागरण कमेटियों, भजन मंडलियों, संगीत ग्रुपों और धार्मिक सभाओं से अपील की है कि वे इस मुहिम का हिस्सा बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कलाकार मर्यादा का उल्लंघन करते हैं, उनका पूर्ण रूप से बायकाट किया जाए।
”हिंदू धर्म की मर्यादा सर्वोपरि है। देवी-देवताओं के नाम पर मनोरंजन और फूहड़ता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम प्रशासन से भी मांग करेंगे कि ऐसे मामलों में त्वरित संज्ञान लिया जाए।”
— हिंदू तख्त जागरण सुधार मंडल

प्रतिष्ठित संस्थाओं ने जताया समर्थन
इस बैठक में मंच संचालन सत्यम कला मंच के प्रधान सतनाम सत्ता ने बखूबी निभाया। कार्यक्रम में शहर की विभिन्न मंदिर कमेटियों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, भजन गायक और धार्मिक संस्थाओं के गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में मंडल के इस निर्णय का समर्थन किया और धर्म की गरिमा बनाए रखने का संकल्प लिया।








