मानव भारती फर्जी डिग्री कांड: भगौड़े मनदीप राणा की दो संपत्तियां कुर्क, ED की बड़ी कार्रवाई

शिमला/सोलन: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मानव भारती विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री घोटाले में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। शिमला स्थित पीएमएलए (PMLA) विशेष अदालत ने मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, मनदीप राणा की दो अचल संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
अदालत ने दिया सख्त संदेश
बता दें कि मनदीप राणा को इस वर्ष 3 जनवरी को भगौड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) घोषित किया जा चुका है। वह लंबे समय से अदालती समन की अनदेखी कर रहा था और जांच में शामिल होने से बच रहा था। इसके बाद ईडी ने भगौड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत कार्रवाई तेज कर दी। विशेष अदालत का यह ताजा फैसला उन अपराधियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है जो कानून से भागकर न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करते हैं।

387 करोड़ का संगठित रैकेट
ईडी की जांच में इस घोटाले की परतें खुलकर सामने आई हैं। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- पारिवारिक मिलीभगत: मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अशोनी कंवर और बेटे मनदीप राणा के साथ मिलकर एक सुव्यवस्थित रैकेट चलाया था।
- एजेंटों का नेटवर्क: देशभर में फैले एजेंटों के माध्यम से छात्रों को पैसों के बदले फर्जी डिग्रियां बेची गईं।
- कुल घोटाला: ईडी के अनुमान के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े से लगभग 387 करोड़ रुपए की काली कमाई (Proceeds of Crime) की गई।
अब तक 200 करोड़ की संपत्ति संलग्न
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अब तक लगभग 200 करोड़ रुपए की संपत्ति संलग्न की जा चुकी है। पीएमएलए निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने भी इन संपत्तियों की पुष्टि कर दी है।
“हमारा लक्ष्य इस वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है। फरार आरोपियों को भारत वापस लाने और घोटाले के हर पहलू को उजागर करने के लिए जांच जारी है।” > — प्रवर्तन निदेशालय (आधिकारिक बयान)

आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, ईडी अब मनदीप राणा की अन्य गुप्त संपत्तियों का पता लगा रही है। जांच एजेंसी का पूरा ध्यान अब फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण और फर्जी डिग्रियों से अर्जित शेष राशि को रिकवर करने पर है। सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले ने पहले ही शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा रखा है।








