मानवाधिकार आयोग की टीम ने पठानकोट के सिविल अस्पताल और नशा मुक्ति केंद्र का किया औचक निरीक्षण
पठानकोट:राज्य मानवाधिकार आयोग के कोर ग्रुप के सदस्यों ने मानवाधिकार आयोग के आदेशों के तहत पठानकोट के सिविल अस्पताल और नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अस्पताल के मुर्दा घर, वार्डों और नशा मुक्ति केंद्र का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं, कमियों और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की गहन जांच की।
निरीक्षण के मुख्य बिंदु:
- कमियों और सुविधाओं की समीक्षा: निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि अस्पताल में व्हीलचेयर की कमी है और बाथरूम आदि की स्थिति गंदी है, जिन्हें जल्द साफ करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
- नशा मुक्ति केंद्र की जांच: कोर ग्रुप ने नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीजों से बातचीत की, उनके इलाज की प्रक्रिया को परखा और डॉक्टरों से मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।
- अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा: टीम ने मुर्दा घर के अंदर जाकर भी हालात का जायजा लिया और वहां चल रहे व्यवस्थागत सिस्टम की पूरी जांच की।
- विशेषज्ञों का संदेश: मानवाधिकार आयोग की टीम ने नशा पीड़ितों से मिलकर उन्हें नशे जैसी बुरी आदत को छोड़ने के लिए प्रेरित किया तथा अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि जो मरीज इलाज के लिए आगे आते हैं, उन्हें पूरी मेडिकल और गोपनीयता की सुविधाएं प्रदान की जाएं।
दौरान दिए गए निर्देश:
कमिश्नर सदस्यों ने बताया कि पठानकोट में पिछले कुछ दिनों से लगातार युद्ध स्तर पर नशा विरोधी सेमिनार और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज का यह औचक निरीक्षण किया गया है। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि जो मरीज एनडीपीएस (NDPS) मामलों के तहत इलाज के बाद डिस्चार्ज होते हैं, उनका सरकार की हिदायतों के अनुसार हर 15 दिन बाद डोप टेस्ट (dope test) होना अनिवार्य है और वे 6 महीने तक डॉक्टरों की निगरानी में रहते हैं।
मानवाधिकार आयोग की टीम ने कहा कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पाई गई हैं और जो सुझाव सामने आए हैं, उनकी रिपोर्ट तैयार कर आगामी कार्रवाई के लिए आयोग को भेजी जाएगी।












