अवैध खनन का खेल: पुलिस पकड़ती है मशीनें… अगली रात फिर गूंजती है खड्ड, आखिर किसका संरक्षण?
हिमाचल प्रदेश की खन्नी पंचायत के ब्राह्मणा दनाल और बिल्लां दा टाल क्षेत्रों में अवैध खनन का खौफनाक खेल लगातार जारी है, जहाँ रात के अंधेरे में गरजती भारी-भरकम मशीनें नदियों का सीना लगातार चीर रही हैं। एएमआई न्यूज की टीम ने 28 सितंबर से लेकर 29 सितंबर की तड़के 1:15 बजे तक की पूरी टाइमलाइन, सटीक समय और जीपीएस लोकेशन के साथ अवैध खनन की इन तस्वीरों को कैमरे में कैद किया है।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस भले ही दो महीने में दो बार कार्रवाई कर 5 से 7 जेसीबी और टिप्पर जब्त करती है, लेकिन कार्रवाई के ठीक अगली ही रात वही मशीनें और अधिक संख्या में खड्ड में लौट आती हैं। एसी कमरों में बैठे जिम्मेदार विभागों को यह सब क्यों नहीं दिखाई देता और आखिर खनन माफिया को इतनी बेफिक्री किस बात की है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
एएमआई न्यूज की इस एक्सक्लूसिव पड़ताल में सामने आया है कि 28 सितंबर को मौके पर अवैध खनन को रिकॉर्ड करने के ठीक बाद, 29 सितंबर की तड़के 1:15 बजे भी बेखौफ होकर भारी-भरकम मशीनें खड्ड का सीना चीरती नजर आती हैं। सोचने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी मशीनें और रेता-बजरी से भरे टिप्पर सड़कों से होकर गुजरते हैं, फिर भी किसी नाके पर इन्हें क्यों नहीं रोका जाता। रात को चलने वाली इन मशीनों का नतीजा सुबह के उजाले में गहरे गड्ढे, छिन्न-भिन्न हुई जमीन और तबाही की ओर बढ़ती नदियों के रूप में साफ दिखाई देता है।
एक मशीन पकड़े जाने पर तुरंत दूसरी मशीन का पहुंच जाना इस बात का साफ इशारा करता है कि इसके पीछे केवल ड्राइवर नहीं, बल्कि कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण और सफेदपोश हाथ काम कर रहा है।
एएमआई न्यूज प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग से सीधा सवाल पूछता है कि जब मीडिया टीम मौके पर पहुंचकर टाइम स्टैम्प के साथ तस्वीरें दिखा सकती है, तो गश्त करने वाली टीमें कहां गायब रहती हैं? मशीनों को जब्त करने के अगले ही दिन वहां और अधिक मशीनों का आ जाना और इसके असली मालिकों व आकाओं तक जांच का न पहुंचना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। जनता को कोई रटा-रटाया जवाब नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए, और खनन से जुड़ी इस खबर पर लगातार नजर बनी रहेगी।













