पंजाब में ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों की खुली पोल: बीजेपी विधायक अश्विनी शर्मा ने सरकार को घेरा, गिनाईं जमीनी कमियां
पठानकोट / चंडीगढ़:भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पठानकोट से विधायक अश्विनी शर्मा ने राज्य सरकार के ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि पंजाब में शिक्षा की जमीनी हकीकत सरकार के विज्ञापनों और दावों से बिल्कुल उलट है।
अश्विनी शर्मा ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि जालंधर जैसे प्रमुख जिलों में भी कई स्कूल आज टीन के शेड के नीचे चल रहे हैं। जहाँ पक्की इमारतें हैं, वहाँ बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने बताया कि अकादमिक वर्ष 2025-2026 के दौरान पूरे पंजाब में 1749 ऐसे स्कूल हैं जो केवल एक शिक्षक (सिंगल टीचर स्कूल) के भरोसे चल रहे हैं। कई गाँवों में तो हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को अपने निजी खर्चे पर शिक्षक रखने पड़ रहे हैं।
प्रमुख बिंदु जिन पर उठाए गए सवाल:
- प्रधानाचार्यों की भारी कमी: पंजाब के सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रधानाचार्यों (Principals) के 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।
- अधिकारियों की कमी: राज्यभर में कुल 228 ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) की पोस्ट हैं, जिनमें से 110 पद खाली हैं।
- शिक्षकों की जेब से हो रहा खर्च: लुधियाना के शिक्षक नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राइमरी स्कूलों के टूर्नामेंट तो शुरू करवा दिए हैं, लेकिन न तो इसके लिए कोई फंड जारी किया गया है और न ही पर्याप्त खेल शिक्षक (Sports Teachers) उपलब्ध हैं। मजबूरन अध्यापकों को अपनी जेब से पैसे खर्च करके ये खेल प्रतियोगिताएं करवानी पड़ रही हैं।
- ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ और बस सेवा विवाद: एक तरफ स्कूल बुनियादी ढ़ांचे और अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के महत्वाकांक्षी ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ भी बच्चों के लिए शुरू की गई बस सेवा समय पर न चलने के कारण चर्चा और विवादों में बने हुए हैं।
भाजपा विधायक ने सरकार से मांग की है कि विज्ञापनों की राजनीति छोड़कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था की इन बुनियादी कमियों को तुरंत दूर किया जाए, ताकि गरीब और आम जनता के बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए।











