सैली रोड पर अवैध बैनरों का दबदबा: क्या नगर निगम और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के खाते में जा रहा है विज्ञापनों का पैसा?
पठानकोट, ऐ एमआई न्यूज़:सड़कों की सुंदरता, सुरक्षा और विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए बनाए गए डिवाइडर और खंबे आजकल विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार का मुख्य जरिया बनते जा रहे हैं। पठानकोट की सैली रोड पर चारों तरफ बड़े-बड़े बैनर, होर्डिंग्स और फ्लेक्स इस तरह सजाए गए हैं कि यह सड़क किसी राजनीतिक दल का पोस्टर प्रदर्शन स्थल प्रतीत होती है।
नियमों की हो रही खुलेआम अनदेखी
सवाल यह है कि क्या यह सब कानूनी दायरे में है? जब इस संबंध में नगर निगम के रेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी प्रदीप से बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि खंभों और डिवाइडरों पर लगे इस प्रकार के छोटे-बड़े बैनर पूरी तरह अवैध हैं। नियमों के अनुसार, केवल 29 इंच गुणा 29 इंच के आकार के स्वीकृत बोर्ड ही लगाए जा सकते हैं, इसके अलावा कुछ भी नहीं। प्रशासनिक दस्तावेजों में ये बैनर गैर-कानूनी हैं, लेकिन धरातल पर ये खुलेआम हवा में लहरा रहे हैं।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की सड़क पर भी अवैध कब्जा
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह सड़क इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आती है। यहाँ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बैनरों की देखा-देखी अब सड़क किनारे और डिवाइडरों पर प्राइवेट दुकानों व रेस्टोरेंट संचालकों ने भी अपने छोटे बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं।
इस स्थिति ने नगर निगम और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या इन दर्जनों बैनरों और होर्डिंग्स का राजस्व विभाग को मिल रहा है?
- क्या विज्ञापनों की यह फीस सरकारी खातों में जमा हो रही है या सब कुछ बिना किसी शुल्क के चल रहा है?
- क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं और रसूखदारों के लिए सभी नियम माफ हैं?
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
हैरानी की बात यह है कि रोजाना इसी मार्ग से जिम्मेदार अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन मीडिया द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अब प्रशासन की नींद टूटी है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी अवैध बैनरों के खिलाफ जल्द सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शहर में अन्य स्थानों पर भी इस तरह के बोर्ड लग रहे हैं, जिनकी ग्राउंड रिपोर्ट जल्द ही ऐ एमआई न्यूज़ (AMI News) पर साझा की जाएगी। कल को इन बैनरों के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।
इसके साथ ही, विज्ञापन व्यवस्था संभालने वाली कंपनी ‘लीड्स’ (LEADS) से भी यह सवाल है कि वहां कागजों में कितने बोर्डों का ब्योरा सबमिट करवाया गया है और असल में जमीन पर कितने अधिकृत बोर्ड लगे हैं? इन सभी आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही पाठकों के सामने लाई जाएगी।












