खनन माफिया पर मेहरबान प्रशासन? बार-बार सबूत और चेतावनी के बाद भी तीनों विभाग खामोश!
नूरपुर (हिमाचल प्रदेश):क्या नूरपुर में खनन माफिया के आगे पुलिस, खनन विभाग और जिला प्रशासन ने पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं? या फिर इस अवैध कारोबार को किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण का अभयदान प्राप्त है? ये तीखे सवाल अब धरातल की कड़वी सच्चाई बयां कर रहे हैं।
मामला 19 सितंबर का है। सुबह की रिपोर्ट सामने आने के बाद भी उसी दिन ढलती शाम—ठीक 5:37 मिनट और 6:48 मिनट पर—डमटाल के राम गोपाल मंदिर से लेकर हिमाचल प्रदेश की खंनी पंचायत के ब्राह्मणा दनार और बिल्ला दा टाल तक माफिया बेखौफ होकर नदियां खोदता रहा।
ऐएमआई न्यूज़ के सीधे और स्पष्ट सवाल:
- क्यों है खामोशी? यदि हमारी रिपोर्टिंग टीम अपनी जान जोखिम में डालकर मौके पर पहुंच सकती है और समय व तारीख के साथ ऑन-कैमरा सबूत ला सकती है, तो खबरें प्रसारित होने के बाद भी ये तीनों विभाग मौके पर क्यों नहीं पहुंच पा रहे?
- कार्रवाई क्यों नहीं? हम एसपी नूरपुर इल्मा अ अफरोज को एक बार नहीं, बल्कि बार-बार चेतावनी दे चुके हैं और धरातल की कड़वी सच्चाई आईने की तरह सामने रख चुके हैं। इसके बावजूद न तो मौके पर गश्त दिखती है, न कोई मॉनिटरिंग और न ही कोई सख्त कार्रवाई।
- किसका डर? क्या नूरपुर पुलिस, खनन विभाग और प्रशासन ने खनन माफिया के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं, या किसी राजनीतिक संरक्षण के खौफ से ये विभाग ठोस एक्शन लेने से कतरा रहे हैं?
प्रशासनिक लाचारी और मिलीभगत की गवाही
बार-बार चेतावनी देने और सबूत सौंपने के बाद भी यदि ये तीनों विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लाचारी और मिलीभगत की गवाही देता है। एएमआई न्यूज़ इन सभी गैर-जिम्मेदार विभागों से यह जवाब मांगता है कि चक्की खड्ड पर यह अवैध खनन कब बंद होगा और डमटाल के राम गोपाल मंदिर की जमीन को कब तक छलनी होने से बचाया जाएगा?












