सुंदरनगर में फिर वही गड्ढे: दो दिन में ही खुली सड़क मरम्मत की पोल, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
सुंदरनगर में विकास कार्यों और सड़क निर्माण के दावों की पोल एक बार फिर महज कुछ ही घंटों में खुल गई है। शहर के एक प्रमुख मार्ग पर कुछ दिन पूर्व ही गहरे गड्ढों और बदहाल स्थिति को लेकर मीडिया में खबरें प्रमुखता से दिखाई गई थीं, जिसके बाद प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आए थे। उस दौरान सड़क के गड्ढों को भरकर इसे समतल कर दिया गया था, जिससे स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली थी कि अब उनका आवागमन सुगम हो सकेगा। लेकिन हैरानी और रोष का विषय यह है कि मरम्मत के केवल दो से तीन दिन के भीतर ही सड़क की परतें उखड़ने लगीं और वहां फिर से जानलेवा गड्ढे उभर आए हैं।
इस स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसमें बरती गई अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और लीपापोती करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। यदि काम कायदे से और मजबूत सामग्री के साथ किया गया होता, तो सड़क कुछ ही दिनों में इस तरह दोबारा जर्जर अवस्था में नहीं पहुंचती। सड़क पर बने इन गड्ढों के कारण रोजाना सफर करने वाले दफ्तर जाने वाले लोग, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग अपनी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह मार्ग किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा बन गया है।
स्थानीय जनता और दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों के चक्कर काटे और गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस लचर कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर कब नकेल कसता है और कब इस सड़क का सुदृढ़ व स्थाई निर्माण करवाया जाता है, ताकि जनता को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।











