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पठानकोट के युवा खिलाड़ियों ने एशियाई कराटे चैंपियनशिप में रचा इतिहास, देश और पंजाब के लिए जीते दो सिल्वर मेडल ​ 

पठानकोट के युवा खिलाड़ियों ने एशियाई कराटे चैंपियनशिप में रचा इतिहास, देश और पंजाब के लिए जीते दो सिल्वर मेडल

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अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच से भारत और पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि सामने आई है। जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित 24वीं एशियाई कराटे चैंपियनशिप (24th AKF Championship) में पठानकोट के दो होनहार खिलाड़ियों ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। इन युवा खिलाड़ियों ने कड़े मुकाबलों में एशिया के दिग्गजों को मात देकर देश के लिए दो सिल्वर मेडल हासिल किए हैं।

​विराज और अंशिका ने किया देश का नाम रोशन

जॉर्डन में 8 से 11 तारीख तक आयोजित इस प्रतिष्ठित महामुकाबले में पंजाब के इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया:

  • ​अंशिका भारद्वाज: ने अंडर-21 आयु वर्ग के -68 किलोग्राम भार वर्ग में बेहतरीन दांव-पेंच दिखाते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वर्तमान में अंशिका सीएसएस (CSS) के स्पोर्ट्स कोटे के माध्यम से हेड कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रही हैं।
  • ​विराज सैनी: ने अंडर-21 आयु वर्ग के -60 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता।

​जिला पठानकोट कराटे एसोसिएशन के अनुसार, एशियन कराटे चैंपियनशिप के इतिहास में पंजाब के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले ये पहले दो खिलाड़ी हैं। इस दोहरी सफलता से पूरे प्रदेश और देश भर के खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।

​पठानकोट में निकला भव्य रोड शो, जश्न में डूबा शहर

दोनों चैंपियंस के अपने गृह नगर पठानकोट लौटने पर शहरवासियों ने उनका स्वागत किसी ऐतिहासिक पर्व की तरह किया। चक्की पुल से लेकर गांधी चौक तक एक विशाल और भव्य रोड शो निकाला गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, फूलों की वर्षा और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों के साथ युवा एथलेट्स का अभिनंदन किया गया। खेल प्रेमियों, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, जिला कराटे एसोसिएशन के सदस्यों और कोचों ने दोनों खिलाड़ियों को मालाएं पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनकी इस महान उपलब्धि पर गर्व जताया।

​कोचों और अभिभावकों के संघर्ष को मिला फल

खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और कोचों की कठिन ट्रेनिंग और वित्तीय समर्थन का बड़ा योगदान रहा है। कम उम्र से ही दिन-रात अभ्यास कर इन बच्चों ने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ी के युवाओं के लिए एक मिसाल है। खिलाड़ियों ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच अर्जुन सर, पंजाब एसोसिएशन, फेडरेशन इंडिया, और अपनी जीत में हर कदम पर साथ देने वाले सभी सहयोगियों व परिजनों को दिया है।

Ami News
Author: Ami News

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