पठानकोट सब्जी मंडी में जलभराव और लावारिस पशुओं का आतंक
पठानकोट की सब्जी मंडी बनी स्विमिंग पूल, बेहाल व्यापारियों और ग्राहकों का जीना मुहाल
पठानकोट की मुख्य सब्जी मंडी में जलभराव और लावारिस पशुओं की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बार-बार शिकायतों और खबरों के प्रकाशन के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिससे मंडी में आने-जाने वाले लोगों और व्यापारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जलभराव से तालाब बनी मंडी
रोजाना की हल्की या तेज बारिश के बाद सब्जी मंडी किसी स्विमिंग पूल में तब्दील हो जाती है। मंडी परिसर में जलभराव और कीचड़ के कारण लोगों का पैदल चलना या दोपहिया वाहनों से निकलना दूभर हो गया है। हालात यह हैं कि सब्जी विक्रेता जो अपनी दुकानें लगाकर फल और सब्जियां बेचते हैं, वे हर दिन नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। पानी निकासी का कोई स्थायी समाधान न होने के कारण ग्राहकों ने भी मंडी आना काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे दुकानदारों का कारोबार चौपट हो रहा है।
बेसहारा पशुओं का खतरा
जलभराव के साथ-साथ मंडी परिसर में घूम रहे बेसहारा पशुओं ने भी व्यापारियों और खरीदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई बार पशुओं के आपस में भिड़ने या अचानक सामने आने से हादसों का डर बना रहता है। स्थानीय रेहड़ी-फड़ी वालों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन आज तक न तो जलभराव की समस्या का समाधान हुआ और न ही बेसहारा पशुओं को यहां से हटाया गया।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
व्यापारियों का कहना है कि वे अब थक हार कर चुप बैठने को मजबूर हैं क्योंकि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। दुकानदारों का साफ कहना है कि जब तक मंडी से सामान की बिक्री सुचारू रूप से नहीं होगी, तब तक उनकी रोजी-रोटी की समस्या का हल नहीं निकल सकता। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब नींद से जागता है और कब तक सब्जी मंडी को इस दयनीय स्थिति से मुक्ति दिलाई जाती है।











