AMI News विशेष रिपोर्ट: पठानकोट जिला वेटरनरी अस्पताल से स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू पर विशेष जानकारी
पठानकोट जिला वेटरनरी अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पठानकोट द्वारा निजी अखबारों और मीडिया में जानकारी दी गई है। इस संबंध में वेटरनरी ऑफिसर डॉ. मनीषा ने स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू के लक्षणों, बचाव और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया है।
स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू के लक्षण और अंतर
- स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से H1N1 वायरस से और बर्ड फ्लू H5N1 वायरस से फैलता है। दोनों ही बीमारियां जानवरों से इंसानों में फैल सकती हैं।
- इसके लक्षण सामान्य फ्लू की तरह ही होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से खांसी, सांस लेने में कठिनाई, जुकाम और कभी-कभी सामान्य बुखार शामिल है।
- स्वाइन फ्लू है या बर्ड फ्लू, इसकी पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकती है। बर्ड फ्लू के मामलों में पक्षियों से इंसानों में संक्रमण फैलने की आशंका बहुत अधिक रहती है।
बचाव और सुरक्षात्मक उपाय
- पोल्ट्री फार्म या पशुओं के संपर्क में आने वाले कामगारों और कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा रखनी चाहिए। काम के दौरान पीपीई किट, मास्क, कैप और ग्लव्स जैसे सुरक्षात्मक उपकरणों का नियमित इस्तेमाल करना अनिवार्य है।
- पठानकोट पॉलीक्लिनिक द्वारा हर साल पोल्ट्री फार्मों में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की निगरानी और सैंपल जांच की जाती है। पोल्ट्री फार्म और स्वाइन फार्म से सैंपल एकत्र करके आगे जांच के लिए आरडीडीएल (RDDL) जालंधर भेजे जाते हैं।
- यदि किसी पोल्ट्री फार्म में एक भी पक्षी बर्ड फ्लू पॉजिटिव पाया जाता है, तो उस फार्म को सील कर दिया जाता है और वहां मौजूद सभी पक्षियों को नियमानुसार नष्ट कर दिया जाता है। साथ ही, उसके आसपास के दायरे में आने वाले अन्य पोल्ट्री फार्मों के पक्षियों को भी एहतियातन कल कर दिया जाता है और गहरा दफनाया जाता है।
वायरस के प्रकार और गंभीर प्रभाव
- बर्ड फ्लू दो प्रकार का होता है—लो पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा और हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा। लो पैथोजेनिक में फ्लू जैसे लक्षण और साइनस की सूजन मिलती है।
- हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा में अचानक और अत्यधिक मोर्टेलिटी (मृत्यु दर) होती है, जिसमें अक्सर कोई स्पष्ट शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। गंभीर मामलों में ट्रेकिया और फेफड़ों में कंजेशन व हेमरेज (रक्तस्राव) पाए जाते हैं, क्योंकि यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।













