नेपाल की तबाही का असर: यूपी के कुशीनगर में गंडक नदी से बहकर आईं 3 लाशें, नेपाल बॉर्डर पर हाई अलर्ट
पड़ोसी देश नेपाल में आए भीषण बाढ़ और प्रलयकारी फलेश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल में इस आपदा के कारण 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मलबे और पानी के तेज बहाव के बीच अब इस त्रासदी का असर भारत के उत्तर प्रदेश तक देखने को मिल रहा है। यूपी के कुशीनगर जिले में गंडक नदी के उफान के साथ नेपाल से बहकर आईं 3 लावारिस लाशें बरामद हुई हैं।
कुशीनगर जिले के खड्डा इलाके के मदनपुर-सुकरौली क्षेत्र में गंडक बैराज के पिलर नंबर-3 के पास पानी में कुछ शव तैरते हुए देखे गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर हरकत में आई स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और पुलिस की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तीनों शवों को नदी से बाहर निकाला। हालांकि, अभी तक इन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। प्रशासन ने नेपाल के सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों से संपर्क साधा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये शव नेपाल में बाढ़ की चपेट में आकर लापता हुए लोगों के तो नहीं हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले पड़ोसी जिले महराजगंज की नदी से भी 4 शव बरामद किए गए थे। लगातार मिल रहे शवों और रेस्क्यू अपडेट्स ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
[नदी में बहकर आ रहा है घरेलू सामान और मलबा]
सिर्फ इंसानी शव ही नहीं, बल्कि नेपाल की तरफ से आ रहे पानी के तेज बहाव में गाड़ियां, घरेलू सामान, गैस सिलेंडर, फर्नीचर और भारी मात्रा में पहाड़ी मलबा भी बहकर भारतीय सीमा में पहुंच रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों से सख्त अपील की है कि वे इस बहते हुए सामान या लकड़ी को निकालने के लिए उफनती नदी में बिल्कुल न उतरें, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।
[प्रशासन की अपील और सतर्कता]
गौरतलब है कि 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आए उफान के कारण विनाशकारी फलेश फ्लड आया था। इसका पानी त्रिशूल और गंडक नदियों के रास्ते भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचा। हालांकि, अब गंडक नदी में पानी का बहाव कुछ कम जरूर हुआ है, जिससे तात्कालिक खतरा टलता दिख रहा है। इसके बावजूद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और तटीय इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।











