प्रधानमंत्री मोदी की चार-दिवसीय विदेश यात्रा: उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर रहेंगे पीएम, एससीओ शिखर सम्मेलन में रखेंगे भारत का पक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से चार-दिवसीय अहम विदेश यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, जिसके पहले चरण में वह उज्बेकिस्तान पहुंचेंगे। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर होने वाली यह प्रधानमंत्री की चौथी यात्रा है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर विशेष चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज्बेकिस्तान-2030’ के साझा विकास दृष्टिकोण पर भी अपने विचार साझा करेंगे। अपनी ताशकंद यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और ‘ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज’ स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे।
उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस वर्ष एससीओ की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ भी है, और भारत 2017 से इसका पूर्ण सदस्य है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, शिखर सम्मेलन के दौरान क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद आज भी इस क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिनका मुकाबला करने के उद्देश्य से एससीओ का गठन हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी शिखर बैठक को संबोधित करते हुए सुरक्षा, संपर्क और अवसरों से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती से रखेंगे।
इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भी शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन से इतर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग से बैठक होने की भी जानकारी है। किर्गिस्तान प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मध्य एशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक छठे ‘विश्व घुमंतू खेलों’ के उद्घाटन समारोह में भी शिरकत करेंगे। मध्य एशिया के इन दो देशों की यह कूटनीतिक यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और भारत के रणनीतिक हितों को नई ऊंचाइयां देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।











