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सड़क पर बेसहारा पशु और आवारा कुत्ते: सिर्फ परेशानी नहीं, जानलेवा खतरा

सड़क पर बेसहारा पशु और आवारा कुत्ते: सिर्फ परेशानी नहीं, जानलेवा खतरा

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 सड़कों पर डेरा डाले बेसहारा मवेशी और आवारा कुत्ते अब केवल आवाजाही में बाधा नहीं बन रहे, बल्कि लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। आए दिन सड़क हादसे, अचानक सामने आने वाले पशु या वाहनों के पीछे भागते कुत्ते दोपहिया वाहन चालकों के लिए काल साबित हो रहे हैं।

​हादसों का बढ़ता ग्राफ और डर का माहौल

​शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी इलाकों तक, झुंड में घूम रहे आवारा कुत्ते राहगीरों में डर पैदा कर रहे हैं। कई बार ये कुत्ते अचानक लोगों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे ‘डॉग बाइट’ और वाहन अनियंत्रित होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। लेकिन इस गंभीर समस्या का समाधान सिर्फ इन बेजुबानों को सड़कों से जबरन हटाना नहीं है, बल्कि इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

​स्थायी समाधान की सख्त जरूरत

​इस दिशा में प्रशासन और समाज को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे:

  • ​कैटर और एनिमल शेल्टर: बेसहारा गायों के लिए सुरक्षित ‘कैटल शेल्टर’ और आवारा कुत्तों के लिए ‘एनिमल शेल्टर’ की व्यवस्था हो, जहां उन्हें समय पर चारा, पानी और चिकित्सा मिल सके।
  • ​नागरिकों की जिम्मेदारी: आम जनता को भी सड़क पर पशु देखकर अपनी रफ्तार धीमी रखनी चाहिए, दूरी बनाए रखनी चाहिए और उन्हें परेशान या भगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
  • ​स्थायी नीति: सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पशु सड़क से कब हटेंगे, बल्कि यह है कि उन्हें सुरक्षित ठिकाना कब मिलेगा ताकि सड़कें और बेजुबान दोनों सुरक्षित रह सकें।

​एक सुरक्षित शहर की परिकल्पना

​आखिरकार, एक सुरक्षित शहर वही है जहाँ सड़क पर चलने वाला इंसान भी बेखौफ हो और भटकता बेजुबान भी सुरक्षित। अब वक्त आ गया है कि सिर्फ शिकायतों तक सीमित रहने के बजाय एक स्थायी समाधान की ओर कदम बढ़ाया जाए, ताकि सड़कों पर हादसों का यह सिलसिला हमेशा के लिए थम सके।

Ami News
Author: Ami News

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