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AMI News विशेष: पठानकोट के बमियाल बॉर्डर पर बारिश ने खोली पोल, सरकारी स्कूल परिसर में भरा पानी; बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर मंडराया खतरा

पठानकोट के बमियाल बॉर्डर क्षेत्र में बारिश के बाद बिगड़े हालात: सरकारी स्कूल परिसर में भरा पानी, बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर मंडराया खतरा

​पठानकोट:पठानकोट के बमियाल बॉर्डर क्षेत्र में भारी बारिश के बाद सरकारी स्कूलों के हालात बद से बदतर हो गए हैं। पानी की उचित निकासी न होने के कारण सरकारी स्कूल परिसर में भारी जलभराव हो गया है, जिससे पानी कक्षाओं तक पहुंच गया है। इस गंभीर समस्या के चलते बच्चों को स्कूल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कई छात्र स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

​अव्यवस्था और सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल में पानी की निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। हर बार बारिश होने पर यहां पानी जमा हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

​स्थानीय निवासी सुनील गुप्ता ने बताया कि बमियाल क्षेत्र में पानी की निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है। हर 4-5 साल बाद नेता और अधिकारी केवल यह आश्वासन देकर चले जाते हैं कि कूलें और निकासी ठीक करवा दी जाएंगी, लेकिन धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने प्रशासन से स्कूल के लिए विशेष फंड जारी करने और जलभराव का स्थायी समाधान निकालने की कड़ी मांग की है।

​प्रशासन और स्कूल प्रबंधन का पक्ष

​दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन समिति और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल के प्रतिनिधि के अनुसार, स्कूल में पानी की निकासी के लिए दो 4-इंच के डीप बोर और दो मोटरें लगाई गई हैं ताकि पानी को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से बिजली न होने के कारण समय पर पानी की निकासी नहीं हो सकी, लेकिन बिजली आते ही मोटरों के जरिए पानी को बाहर निकाला जा रहा है।

​प्रशासन का यह भी कहना है कि यह स्कूल पीएम श्री स्कूल (PM SHRI School) योजना के अंतर्गत आता है, जिसके तहत अगले कुछ वर्षों में इसे उच्च स्तर पर विकसित करने और विभिन्न बुनियादी सुधारों के लिए पांच साल का प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

​बावजूद इसके, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक स्थायी जल निकासी प्रणाली का निर्माण नहीं होता, तब तक बारिश के दिनों में बच्चों और उनके अभिभावकों को हर साल इस मुसीबत से जूझना पड़ेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालता है।

Ami News
Author: Ami News

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