सुर्खियों में सोनिया गांधी की आत्मकथा: ‘गम का पहाड़ टूटने और अपनों को खोने के दर्द ने मुझे राजनीति में लाया’
नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग : ए जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) जल्द ही पाठकों के सामने आने वाली है। इस 544 पन्नों की बहुचर्चित पुस्तक का प्रकाशन 10 नवंबर को न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ (Alfred A. Knopf) द्वारा हार्डकवर और ई-बुक संस्करण में किया जाएगा। वहीं, पेंगुइन रैंडम हाउस इसका ऑडियो संस्करण जारी करेगा। प्रकाशक ने पहली ही बार में पुस्तक की एक लाख प्रतियां छापने की घोषणा की है।
दिल में संजोई भावनाओं को साझा करना आसान नहीं था
प्रकाशक द्वारा जारी बयान में 79 वर्षीया सोनिया गांधी ने पुस्तक से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने कहा, “गम का पहाड़ टूटने और अपनों को खोने के दर्द ने मुझे राजनीति की दुनिया में ला खड़ा किया। तब तक मैं अपनी निजता की पूरी तरह रक्षा करती थी।” उन्होंने आगे कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें उन बातों, पलों और गहरी भावनाओं को सार्वजनिक करना पड़ा, जिन्हें उन्होंने वर्षों से अपने दिल में संजोकर रखा था।
प्रेम, त्रासदी और राजनीति का सफर
सोनिया गांधी ने बताया कि जब उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने के बाद अपने अतीत को देखा, तो पाया कि इटली के छोटे से कस्बे के बचपन की सादगी से लेकर भारत के जटिल जीवन तक, उनके पूरे सफर को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी ‘प्रेम और निष्ठा’ रही है।
इस आत्मकथा की शुरुआत 1965 में इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है, जहां 19 वर्षीय सोनिया माइनो की पहली मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। पुस्तक में इंदिरा गांधी से उनकी पहली मुलाकात, हिंदी सीखने के प्रयास, साड़ी पहनना, भारतीय पकवानों का स्वाद और गांधी परिवार पर आए त्रासदियों के सिलसिले का उल्लेख है—जिसमें संजय गांधी की दुर्घटना में मौत, 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या, राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना और फिर 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की भी शहादत शामिल है।
2004 का फैसला और भारत के बदलाव की झलक
किताब में इस बात का भी ब्योरा है कि कैसे सालों तक दबाव को टालने के बाद सोनिया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 2004 में आम चुनाव जीतने के बावजूद प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सोनिया गांधी के अनुसार, यह पुस्तक पाठकों को पिछले छह दशकों में भारत में आए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलावों को समझने का एक अनूठा नजरिया प्रदान करेगी।
प्रकाशक संस्था की कार्यकारी उपाध्यक्ष और प्रधान संपादक जॉर्डन पाव्लिन ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक आत्मकथा को प्रकाशित करके सम्मानित महसूस कर रहे हैं, जो जीवन, परिवार, संघर्ष और भारत के साथ सोनिया गांधी के अटूट जुड़ाव का दस्तावेज है।











